मजदूरों की बदहाली पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार तक फैसला सुरक्षित
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय लॉकडाउन के कारण विभिन्न प्रांतों में फंसे मजदूरों की बदहाली पर स्वत: संज्ञान मामले में आगामी मंगलवार को अपना फैसला सुनाएगा। न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की खंडपीठ ने सभी संबद्ध पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायालय ने कहा …
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय लॉकडाउन के कारण विभिन्न प्रांतों में फंसे मजदूरों की बदहाली पर स्वत: संज्ञान मामले में आगामी मंगलवार को अपना फैसला सुनाएगा। न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की खंडपीठ ने सभी संबद्ध पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायालय ने कहा कि वह इस मामले में नौ जून (मंगलवार) को अपना आदेश सुनाएगा।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने लॉकडाउन की वजह से पलायन कर रहे कामगारों को उनके पैतृक स्थानों तक पहुंचाने के लिए केन्द्र और राज्यों को 15 दिन का समय देने का संकेत दिया। मामले की वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये हुई सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने अपनी यह मंशा जाहिर की। इसके अलावा खंडपीठ ने कहा कि सभी राज्यों को प्रवासियों के लिए रोजगार का सृजन करना चाहिए।
सुनवाई की शुरुआत करते हुए केन्द्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को सूचित किया कि इन प्रवासी श्रमिकों को उनके पैतृक स्थान तक पहुंचाने के लिए तीन जून तक 4,270 ‘विशेष श्रमिक ट्रेन’ चलाई गयी हैं। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि अभी तक एक करोड़ से ज्यादा श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया है और अधिकांश रेलगाड़ियां उत्तर प्रदेश और बिहार गयी हैं।
तुषार मेहता ने कहा कि राज्य सरकारें बता सकती हैं कि अभी और कितने प्रवासी कामगारों को स्थानांतरित करने की आवश्यकता है ओर इसके लिए कितनी रेलगाड़ियों की जरूरत होगी? उन्होंने बताया कि राज्य सरकारों ने जो जानकारी उपलब्ध करायी है उसके आधार पर चार्ट तैयार किया गया है। अभी 171 रेलगाड़ियों की और जरूरत है।
