दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता अध्यादेश जारी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में संशोधन से संबंधित अध्यादेश जारी कर दिया। विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से दी गयी जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के केंद्र सरकार की ओर से भेजे गये प्रस्ताव पर हस्ताक्षर के साथ ही यह अध्योदश लागू हो …
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में संशोधन से संबंधित अध्यादेश जारी कर दिया। विधि एवं न्याय मंत्रालय की ओर से दी गयी जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के केंद्र सरकार की ओर से भेजे गये प्रस्ताव पर हस्ताक्षर के साथ ही यह अध्योदश लागू हो गया।
इस अध्यादेश के प्रभावी होने से कोरोना वायरस ‘कोविड 19′ के कारण बैंक कर्ज के भुगतान में असफल रहने पर संबंधित कंपनी के खिलाफ आईबीसी कानून के तहत कोई नयी कार्रवाई शुरू नहीं की जायेगी।
अध्यादेश के माध्यम से सरकार ने आईबीसी की धारा सात, नौ और 10 में संशोधन किया है, जिसके तहत कोरोना महामारी को लेकर 25 मार्च से शुरू हुए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के कारण वित्तीय दबाव में फंसी कंपनियों को राहत दिये जाने के प्रावधान किये गये हैं।
अध्यादेश में कहा गया है कि 25 मार्च के बाद ऋण चुकता न करने वाली कंपनियों के खिलाफ दिवाला एवं ऋण शेाधन अक्षमता संहिता 2016 के तहत कम से कम छह माह तक दिवाला प्रक्रिया शुरू नहीं की जायेगी। यह अवधि अधिकतम एक साल हो सकती है।
गौरतलब है कि गत तीन जून को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अध्यादेश प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, जिसे राष्ट्रपति के पास भेजा गया था। रामनाथ कोविंद ने आज उस पर अपनी मोहर लगा दी।
