उप्र: उपभोक्ता परिषद का खुलासा, बिजली दरों में 500 फीसदी तक हुई बढ़ोतरी
लखनऊ। प्रदेश में बिजली दरें नहीं बढ़ सकें इसके लिए राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मोर्चा खोल दिया है। उपभोक्ता परिषद की ओर से नियामक आयोग से लेकर ऊर्जा मंत्रालय तक बात पहुंचाई जा रही। बुधवार को उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से मुलाकात कर बिजली दरों में …
लखनऊ। प्रदेश में बिजली दरें नहीं बढ़ सकें इसके लिए राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मोर्चा खोल दिया है। उपभोक्ता परिषद की ओर से नियामक आयोग से लेकर ऊर्जा मंत्रालय तक बात पहुंचाई जा रही। बुधवार को उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा से मुलाकात कर बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं किए जाने की मांग की। इस दौरान उन्होंने बीते आठ सालों में बढ़ोतरी के सभी आकड़ों को प्रतिशतवार रखा।
उपभोक्ता परिषद के आठ साल के बिजली दरों में बढ़ोतरी के प्रतिशतवार रखने से ऊर्जा मंत्री अचंभित हो गए। इस दौरान 300 से लेकर 500 फीसदी तक की बढ़ोतरी के आंकड़ों को सामने रखा गया। जिसके बाद श्रीकांत शर्मा ने कहा कि अब जो भी होगा उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
इस दौरान अवधेश वर्मा ने बताया कि कंपनियों ने छह फीसद लाइन हानियां बढ़ा कर आंकड़ेबाजी का खेलकर वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) दाखिल कर दिया। इसमे लगभग 4500 करोड़ का घाटा दिखाकर बिजली बढ़ोतरी किए जाने की योजना है।
अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि हमने बुधवार को प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा से शक्ति भवन स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान बिजली दरों में कमी कराने के लिए उ.प्र. सरकार से मांग उठाई। इसके साथ ही कहा कि बिजली दर को लेकर हमेशा सरकारों को यह भ्रम रहता है कि बिजली दरों में उ.प्र. में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं की गयी।
उन्होंने कहा कि जो उपभोक्ता परिषद ज्ञापन के माध्यम से यह खुलासा करने जा रहा है जिससे आखें खुल जाएंगी। इस दौरान पिछले 8 वर्षों में ग्रामीण शहरी घरेलू व किसानों की बिजली दरों में 300 से लेकर 500 इजाफा किया गया है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने पिछले आठ वर्षो में घरेलू ग्रामीण व किसानों की बिजली दरों में अधिकतम वृद्धि के आधार पर उ.प्र. सरकार से विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत बिजली दरों में बढ़ोत्तरी को रोकने के लिये आयोग से सिफारिश करने की मांग की है।
