Online Gaming App से कमाई पर कसेगा शिकंजा, जानें क्या है सरकार का प्लान

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Edited By Amrit Vichar
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नई दिल्ली। अगर आप ऑनलाइन गेमिंग ऐप (Online Gaming App) पर ऑनलाइन गेम खेलते हैं तो ये खबर आपके लिए ही है। ऐसे कई तरह के लुभावने ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स हैं जिससे लोग मोटी कमाई कर रहे हैं, जिसके बारे में सरकार को पता ही नहीं है, लेकिन अब देश में ऑनलाइन गेमिंग ऐप की …

नई दिल्ली। अगर आप ऑनलाइन गेमिंग ऐप (Online Gaming App) पर ऑनलाइन गेम खेलते हैं तो ये खबर आपके लिए ही है। ऐसे कई तरह के लुभावने ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स हैं जिससे लोग मोटी कमाई कर रहे हैं, जिसके बारे में सरकार को पता ही नहीं है, लेकिन अब देश में ऑनलाइन गेमिंग ऐप की मनमानी नहीं चलेगी। इसके लिए सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग ऐप पर शिकंजा करने की तैयारी शुरू कर दी है।

बता दें कि देश में मोबाइल गेमिंग इंडस्ट्री (Mobile Gaming Industry) बहुत ही तेजी से ग्रोथ कर रही है। जब इसके कुछ आंकड़े लिए गए तो उसमें सामने आया है कि मौजूदा समय में देश में हर साल करीब 1.5 बिलियन डॉलर (करीब 12 हजार करोड़ रुपये) का बिजनेस फिलहाल ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री ही कर रही है।

इस बिजनेस पर सरकार को कोई राजस्व नहीं मिलता है। इस बिजनेस के अगले तीन साल में यानी साल 2025 तक बढ़कर 5 बिलियन डॉलर (करीब 40,000 करोड़ रुपये) सालाना तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं इंडियन ट्रेड ग्रुप फिक्की (FICCI) और कंसल्टिंग फर्म EY की साल 2020 की रिपोर्ट में बताया गया था कि ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री ने भारत में साल 2019 में 65 अरब रुपये का बिजनेस किया था। इसमें करीब 46 अरब रुपये यानी 71 फीसदी हिस्सेदारी रियल मनी की थी।

एक रिपोर्ट के अनुसार, एक सरकारी पैनल ने भारत में ऑनलाइन गेम्स के लिए एक रेगुलेटरी बॉडी बनाने की सिफारिश की है। ये रेगुलेटरी बॉडी ऐसी गेमिंग ऐप्स पर नजर रखेगी, जो स्किल या लक बाय चांस पर आधारित हैं। इस पैनल ने इन गेमिंग ऐप्स के जुए के अड्डे में तब्दील होने से रोकने और प्रतिबंधित फॉर्मेट्स को ब्लॉक करने के लिए कठोर नियम भी बनाने की सिफारिश की है।

पीएम मोदी के उच्च अधिकारियों के इस पैनल ने कई महीनों की कवायद से देश में ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर को रेगुलराइज करने के लिए एक ड्राफ्ट तैयार किया है। इस बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट से देश में हजारों करोड़ की इंडस्ट्री बन चुके इस सेक्टर के भविष्य की दिशा तय होने की संभावना है।

बता दें कि यह गोपनीय ड्राफ्ट रिपोर्ट 31 अगस्त को सरकार को सौंपी जा चुकी है। ड्राफ्ट में IT मंत्रालय के तहत एक नई रेगुलेटरी बॉडी के गठन की सिफारिश की गई है, जो यह तय करेगी कि कौन से ऑनलाइन गेम्स स्किल या गेम के तौर पर क्वालिफाई करते हैं। इसके बाद उन सभी के नियमन और कानूनी दायरे तय किए जाएंगे।

ड्राफ्ट रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि देश को नए संघीय ऑनलाइन गेमिंग (Digital India Act) कानून की जरूरत है, जो सरकार को प्रतिबंधित गेमिंग फॉर्मेट्स के खिलाफ सजा देने और ब्लॉक करने की शक्ति वाले प्रावधानों के साथ ही उनके नियमन की फ्लेक्सिबिल्टी दे सके. पैनल ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यह लीगल सभी तरह के स्किल गेम्स पर लागू होगा, चाहे वे फ्री हों या फिर पे-टू-प्ले फॉर्मेट के तहत सेवाएं दे रहे हैं।

वहीं पैनल ने साफ तौर पर गेम्बलिंग के बजाय केवल ऑनलाइन स्किल गेम्स को ही मान्यता देने की सिफारिश की है, जिन्हें सरकार हैंडल करे। पैनल ने यह भी नोट किया है कि बहुत सारी गैरकानूनी ऑफशोर बेटिंग व गेम्बलिंग वेबसाइट भारतीय यूजर्स में बेहद पॉपुलर हो गई हैं। इससे बचाव के लिए पैनल ने प्रस्तावित डिजिटल इंडिया कानून में प्रतिबंधित गेम्स की लिस्ट भी शामिल करने की सिफारिश की है। हालांकि पैनल की इस ड्राफ्ट रिपोर्ट के आधार पर अब केंद्रीय IT मंत्रालय एक फाइनल रिपोर्ट तैयार करेगा। इसके बाद यह रिपोर्ट मंजूरी के लिए कैबिनेट सचिवालय को भेजी जाएगी। हालांकि यह सब काम कब तक पूरा हो जाएगा, इसकी कोई डेडलाइन तय नहीं की गई है।

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