मुरादाबाद : तमाशा बनकर रह गई होनहार छात्रों की तकदीर, अधर में पढ़ाई

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मुरादाबाद, अमृत विचार। रूस और यूक्रेन की जंग में भारत के जिन छात्रों की तकदीर भंवर में फंस गई, उनकी जिंदगी अब तमाशा बनकर रह गई है। जहां एक तरफ छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है तो दूसरी तरफ उनके आने वाले कल को लेकर परिजन परेशान हैं। ऐसे कठिन समय में सरकार …

मुरादाबाद, अमृत विचार। रूस और यूक्रेन की जंग में भारत के जिन छात्रों की तकदीर भंवर में फंस गई, उनकी जिंदगी अब तमाशा बनकर रह गई है। जहां एक तरफ छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है तो दूसरी तरफ उनके आने वाले कल को लेकर परिजन परेशान हैं। ऐसे कठिन समय में सरकार से भी यूक्रेन छात्रों को कोई कारगर मदद नहीं मिल रही। पीड़ित छात्रों के दिल में महीनों से टीस बनी उनकी वेदना को शनिवार को टटोलने की कोशिश की गई तो उनकी आंखें नम हो गईं।

शिवांगी गुप्ता कहती हैं कि मार्च में यूक्रेन से वापस भारत आई थीं। उम्मीद थी कि जल्द हालात सामान्य होंगे। लेकिन, यूक्रेन के हालात देखकर वापस लौटना खतरे से भरा होगा। बताया कि मेडिकल की पढ़ाई का चौथा साल है। इसमें क्लीनिक में प्रेक्टिकल कराए जाते हैं। ऐसे में बिना प्रेक्टिकल चिकित्सक बनने की पढ़ाई कैसे संभव है। सरकार ने भी कोई मदद नहीं की। अब कजाकिस्तान में आगे की पढ़ाई करने की सोच रही हूं।

निमिश सक्सेना कहते हैं कि मार्च में यूक्रेन से लौटे थे। जून 2022 में तीसरा वर्ष हुआ है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) द्वारा यूक्रेन से लौटे मेडिकल कोर्स के छात्रों को रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्त होने तक ऑनलाइन कक्षाओं की अनुमति दी जाए। इसके अलावा वह हमें तीसरे से छठे वर्ष के छात्रों के लिए स्थानीय अस्पतालों और निजी क्लीनिक में अभ्यास करने की अनुमति दें।

अमन अतीक मेडिकल के द्वितीय वर्ष के छात्र हैं। वह कहते हैं कि केंद्र सरकार ने अब आदेश जारी किया है कि यूक्रेन के विद्यार्थी अन्य किसी देश में जाकर शिक्षा ले सकते हैं। लेकिन, दूसरे देशों में मेडिकल की पढ़ाई बहुत महंगी है। बताया कि यूक्रेन में पूरे साल की फीस जमा की हुई है। अन्य देशों में ट्रांसफर वैधता समाप्त हो गई है। पढ़ाई अधर में है इससे भविष्य को लेकर चिंता है।

द्वितीय वर्ष के छात्र इमरान का कहना है कि अब वापस जाना मुश्किल हो गया है। क्योंकि नॉटो बॉर्डर पर यूनिवर्सिटी है। ऑनलाइन क्लास शुरु होने वाली है। भारत सरकार ने साफ इंकार कर दिया है। ऐसे में कोई दूसरा रास्ता नहीं है। अब यूक्रेन ही वापस लौटना होगा। दिसंबर या जनवरी में जाने की सोच रहे हैं। अभी थ्योरी से ही काम चल रहा है। यूक्रेन वापस लौटने पर विधिवत पढ़ाई शुरू हो सकेगी।

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