संभल: मदरसों के सर्वे से संचालकों में मची अफरातफरी
संभल, अमृत विचार। समाजवादी पार्टी समेत अन्य विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों के विरोध के बीच प्रदेश सरकार ने गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। मदरसों के सर्वेक्षण के पीछे सरकार का मकसद भले ही मदरसों को मुख्यधारा में लाना हो, लेकिन इस सर्वेक्षण से मदरसा संचालकों में खलबली मची है। …
संभल, अमृत विचार। समाजवादी पार्टी समेत अन्य विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों के विरोध के बीच प्रदेश सरकार ने गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। मदरसों के सर्वेक्षण के पीछे सरकार का मकसद भले ही मदरसों को मुख्यधारा में लाना हो, लेकिन इस सर्वेक्षण से मदरसा संचालकों में खलबली मची है। सरकार के सर्वेक्षण से मदरसा संचालक खुश नहीं है। जनपद संभल में मदरसा सर्वेक्षण कार्य की रिपोर्ट अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में शासन को सौंपनी है।
मदरसों की शिक्षा के आधुनिकीकरण की कवायद और मुख्यधारा में लाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा किया जा रहा सर्वेक्षण कार्य तीन राज्यानुदानित, 53 मान्यता प्राप्त और तकरीबन 60 गैर मान्यता प्राप्त मदरसों वाले जनपद संभल में भी पहुंच चुका है। जबकि यहां जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, उपजिलाधिकारी व जिला प्रशासन को करीब पांच दर्जन ऐसे गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे करना है, जो बिना सरकारी मदद के जकात, इमदाद और आम चंदे से चल रहे हैं। इन मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षक यानी हाफिज, कारी और मौलवियों को मानदेय मिलने का आधार केवल और केवल चंदा है। ऐसे हालात में सरकार का सर्वे गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के संचालकों के लिए किसी चाबुक से कम नहीं है।
संभल सदर कोतवाली क्षेत्र में सर्वे पर हमें कोई ऐतराज नहीं है, सरकार का अधिकार है कि वह प्रदेश के मदरसों की जानकारी ले और उनका हाल जाने। सर्वे से मदरसों को फायदा होगा और मदरसों का तालीमी मैयार बढ़ेगा। साथ ही वो कहते हैं कि सर्वे को लेकर सरकार की नियत और नजरिया ठीक होना चाहिए। हमें सर्वे से ऐतराज नहीं है।
मौलाना मोहम्मद मियां कासमीप्रधानाचार्य मदरसा सिराजुल उलूम, हिलाली सराय संभल।
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