बरेली: कुतुबखाना पुल निर्माण शीघ्र शुरु कराने के लिए अधिवक्ताओं ने नगर मजिस्ट्रेट को दिया ज्ञापन, जाम के झाम से मिलेगी निजात

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 बरेली, अमृत विचार। अधिवक्ता परिषद ने कुतुबखाना पुल निर्माण में व्यापारियों के दबाव को अनुचित बताया। कहा कि पुल निर्माण में बाधा बनने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस संबंध में नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। अध्यक्ष अनुज कांत सक्सेना, महामंत्री विनोद बाबू कनौजिया, सरनाम सिंह, पूरन लाल प्रजापति, ओमपाल सिंह, मनमोहन शर्मा, संध्या आर्या, …

 बरेली, अमृत विचार। अधिवक्ता परिषद ने कुतुबखाना पुल निर्माण में व्यापारियों के दबाव को अनुचित बताया। कहा कि पुल निर्माण में बाधा बनने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस संबंध में नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। अध्यक्ष अनुज कांत सक्सेना, महामंत्री विनोद बाबू कनौजिया, सरनाम सिंह, पूरन लाल प्रजापति, ओमपाल सिंह, मनमोहन शर्मा, संध्या आर्या, गीता कश्यप,रंजना सागर, आरती गिरी आदि ने ज्ञापन देकर कहा कि व्यापारियों के दबाव के कारण अधिकारी व जनप्रतिनिधि पुल बनवाने में रुचि नहीं ले रहे हैं।

कुतुबखाना पुल निर्माण को कुछ लोग अच्छा तो कुछ गलत बता रहे हैं। कोतवाली के पास के एक दुकानदार चाहते हैं कि पुल बन जाए, लेकिन कैमरे के सामने बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी पुल बनाने को लेकर मुहिम चल रही है। अधिवक्ता परिषद ने पुल निर्माण में देरी होने पर व्यापारियों के अनुचित दबाव को गलत बताते हुए नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन देकर शीघ्र पुल बनवाने की मांग की है।

पुल निर्माण के लिए शहर में अलग-अलग लोगों से बातचीत की गई तो कई लोग चाहते हैं कि कुतुबखाना पुल का निर्माण हो, जबकि कुछ लोग विरोध में भी हैं। उनका कहना है कि पुल बनने से व्यापारियों का व्यवसाय खत्म होगा तो हजारों लोगों की नौकरी भी जाएगी। बेरोजगारी बढ़ेगी। इसका ध्यान भी सरकार को रखना चाहिए।

इज्ज्तनगर डीआरएम कार्यालय में तैनात राजीव सक्सेना बताते हैं कि कुतुबखाना पुल व्यापक जनहित में बनना ही चाहिए। लोगों को जाम से मुक्ति मिलेगी और बाजार में आसानी से आवागमन हो सकेगा। साथ ही जिन व्यापारियों की दुकान के आगे उनके वाहन नहीं खड़े हो पा रहे थे, वे भी खड़े हो सकेंगे। सोशल मीडिया पर उन्होंने यह बात कही है।

किला में व्यापार करने वाले राजकुमार मेहरोत्रा कहते हैं कि विरोध उसी का करना चाहिए जो सही हो। कुतुबखाना पुल का विरोध सही नहीं है। इसे बनना चाहिए, क्योंकि आने वाले समय में इस इलाके में जाम बढ़ेगा। पुल बन जाएगा तो राजेन्द्र नगर, आईवीआरआई की तरफ जाने वाला व्यक्ति इसी पुल से होकर निकलेगा। ई-रिक्शा को रोकना होगा। अभी सभी इधर से जा रहे हैं।

निजी कंपनी में नौकरी करने वाले सिविल लाइंस निवासी शिवम मेहरोत्रा पुल निर्माण का विरोध करते हैं। कहते हैं कुतुबखाना शहर का मुख्य बाजार है। शहर से मुख्य चीज खत्म हो जाएंगी तो क्या रहेगा। पुल बनने से सैकड़ों की संख्या में लोगों का रोजगार खत्म हो जाएगा।

फिरोज उद्दीन बताते हैं कि भाजपा सरकार का नारा ही सबका साथ सबका विकास है। ऐसे में पुल तो बनना चाहिए। पुल निर्माण से आवागमन में जनता को सुविधा तो होगी लेकिन सरकार को व्यापारियों का भी हित देखना चाहिए। उनकी दुकानें खत्म नहीं होने पाए, इसका ख्याल भी सरकार को करना होगा। दुकान खत्म होगी तो बेरोजगारी भी बढ़ेगी।

आरटीआई एक्टिविस्ट मुहम्मद खालिद जिलानी पुल निर्माण के लिए व्यापारियों को ही जिम्मेदार बता रहे हैं। उनका कहना है कि पुल के रास्ते में आने वाले दुकानदारों ने मार्ग में अतिक्रमण कर ट्रैफिक जाम करवाया। यदि अतिक्रमण से यातायात जाम नहीं होता तो यहां पुल का निर्माण नहीं होता।

बरेली। अधिवक्ता परिषद ने कुतुबखाना पुल निर्माण में व्यापारियों के दबाव को अनुचित बताया। कहा कि पुल निर्माण में बाधा बनने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस संबंध में नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। अध्यक्ष अनुज कांत सक्सेना, महामंत्री विनोद बाबू कनौजिया, सरनाम सिंह, पूरन लाल प्रजापति, ओमपाल सिंह, मनमोहन शर्मा, संध्या आर्या, गीता कश्यप,रंजना सागर, आरती गिरी आदि ने ज्ञापन देकर कहा कि व्यापारियों के दबाव के कारण अधिकारी व जनप्रतिनिधि पुल बनवाने में रुचि नहीं ले रहे हैं।

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