लखनऊ: मेडल पाकर खिले डॉक्टर्स के चेहरे, कहा-चुनौतियां बहुत आई लेकिन परिणाम ने बढ़ाया हौसला

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लखनऊ, अमृत विचार। यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित डॉ.राम मनोहर लोहिया संस्थान का दूसरा स्थापना दिवस समारोह आज इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में बहुत ही धूमधाम से मनाया गया । इस मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने समारोह को संबोधित किया । वहीं इस अवसर पर एमबीबीएस कर …

लखनऊ, अमृत विचार। यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित डॉ.राम मनोहर लोहिया संस्थान का दूसरा स्थापना दिवस समारोह आज इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान में बहुत ही धूमधाम से मनाया गया । इस मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने समारोह को संबोधित किया ।

वहीं इस अवसर पर एमबीबीएस कर चुके छात्र-छत्राओं को मेडल देकर सम्मानित किया गया। समारोह में मेडल पाने वाले छात्र-छात्राओं ने डॉक्टर बनने के लिए की गयी तैयारी के बारे में खुल कर चर्चा की। उन्होंने कहा कि चिकित्सक बनने का सपना था, जिसको साकार करने के लिए जी तोड़ मेहनत की। रात-दिन पढ़ाई और बीमारी से परेशान मरीजों के सेवाभाव ने डॉक्टर बना दिया। इस मुकाम तक पहुंचने के दौरान चुनौतियां तो बहुत आई लेकिन परिणाम ने हौसला बढ़ा दिया और जब राज्यपाल ने मेडल दिया तो खुशी का ठिकाना न रहा ।

6 गोल्ड मेडल पाने वाली डॉ.शाम्भवी बिष्ट ने बताया कि घर में कोई चिकित्सक नहीं था,इस वजह से चिकित्सक बनने की इच्छा हुई,पढ़ाई कठिन थी,तनाव भी हुआ,लेकिन मेहनत रंग लाई और आज यह मुकाम मिला।

5 गोल्ड मेडल पाने वाले सरल मिश्रा बताते हैँ कि मेडिकल की पढ़ाई करने वालों को घबराना नहीं चाहिए,बल्कि धैर्य बनाकर रखना चाहिए।

गोल्ड मेडल पाने वाली डॉ.अनुष्का ने बताया कि पढ़ाई करते समय यह नहीं सोचा था कि इस मुकाम तक पहुंचेंगे,लेकिन कड़ी मेहनत जितनी कर सकते थे कि और आज उस मेहनत का परिणाम मिला। वहीं अनुष्का के पिता अनुपम अग्रवाल ने बताया कि बहुत खुशी हो रही कि बेटी को गोल्ड मेडल मिला है। अब आगे वह मरीजों की सेवा कर देश व प्रदेश की उन्नति में अपना योगदान दे। ऐसा प्रयास होना चाहिए।

डॉ.शौर्य पाण्डेय को गोल्ड मेडल मिला तो वहां मौजूद उनकी दादी सावित्री पाण्डेय की भी खुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने कहा कि बचपन से ही लगता था कि यह कुछ बड़ा करेगा।

वहीं लोहिया संस्थान से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे शौर्य गुप्ता को भी गोल्ड मेडल मिला है। शौर्य की इच्छा है कि डॉक्टर बनने के बाद वह दूर-दराज के क्षेत्र में सेवा प्रदान करें।

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