उप्र: अब बस मालिकों के कहने पर रद्द होगा बस का अनुबंध
लखनऊ, अमृत विचार। राज्य सड़क परिवहन निगम में अनुबंध पर बसें चला रहे प्राइवेट ऑपरेटरों के प्रार्थना पत्र देने के बाद ही बस का अनुबंध रद्द होगा। इसके बाद ही गाड़ी मालिक और रोडवेज अधिकारी बस के कागजात को सरेंडर के लिए आरटीओ कार्यालय कागजात भेज सकते है। पूर्व में निगम मुख्यालय से क्षेत्रीय प्रबंधकों …
लखनऊ, अमृत विचार। राज्य सड़क परिवहन निगम में अनुबंध पर बसें चला रहे प्राइवेट ऑपरेटरों के प्रार्थना पत्र देने के बाद ही बस का अनुबंध रद्द होगा। इसके बाद ही गाड़ी मालिक और रोडवेज अधिकारी बस के कागजात को सरेंडर के लिए आरटीओ कार्यालय कागजात भेज सकते है। पूर्व में निगम मुख्यालय से क्षेत्रीय प्रबंधकों को अनुबंधित बसों का अनुबंध सीधे तौर पर रद्द करने के निर्देश दिए गए थे।
अनुबंधित बस ऑपरेटरों के विरोध के बाद निगम मुख्यालय से जारी आदेश को वापस ले लिया गया। जिसमें प्रदेश भर में अनुबंधित करीब साढ़े तीन हजार बसों का अनुबंध अब सीधे तौर पर क्षेत्रीय प्रबंधक रद्द नहीं कर सकेंगे। इसके लिए गाड़ी मालिकों की सहमति लेनी होगी।
क्योंकि पूर्व में कई ऐसे मामले सामने आए थे, जिसमें क्षेत्रों के अधिकारी बिना गाड़ी मालिक के कहने पर बसों का अनुबंध रद्द करते हुए कागजात आरटीओ कार्यालय में सरेंडर करा रहे थे। इस मामले में उप्र अनुबंधित बस ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एसीपी सिंह ने बताया कि अनलॉक 01 शुरू होने के एक महीने बाद भी यात्री आभाव में अनुबंधित बसें खड़ी रही। इससे रोडवेज और निजी बस मालिकों को नुकसान हो रहा था। इस नुकसान से बचने के लिए कई बस ऑपरेटरों ने टैक्स व अन्य खर्चो से बचने के लिए बस को कागजात को सरेंटर करने की बात कहीं थी।
