पीलीभीत: हत्यारे पति को सात साल की कैद के साथ ही जुर्माना, पांच साल पहले बिलसंडा थाना क्षेत्र में हुई थी वारदात
पीलीभीत,विधि संवाददाता, अमृत विचार। पांच साल पुराने गैर इरादतन हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय महिला संरक्षण राजीव सिंह ने फैसला सुनाया। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद आरोपी बिलसंडा क्षेत्र के ग्राम राठ के निवासी सुधीर उर्फ सुदेश पुत्र अर्जुन सिंह को दोषी पाकर सात साल की कैद और आठ हजार …
पीलीभीत,विधि संवाददाता, अमृत विचार। पांच साल पुराने गैर इरादतन हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय महिला संरक्षण राजीव सिंह ने फैसला सुनाया। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद आरोपी बिलसंडा क्षेत्र के ग्राम राठ के निवासी सुधीर उर्फ सुदेश पुत्र अर्जुन सिंह को दोषी पाकर सात साल की कैद और आठ हजार रुपये जुर्माना से दंडित किया। राज्य सरकार की ओर से पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र कुमार ने की।
अभियोजन कथानक के अनुसार वादी मुकदमा विश्वनाथ सिंह ने थाना बिलसंडा में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें बताया था कि उसकी पुत्री रेखा की शादी घटना से 10-12 साल पहले ग्राम राठ के निवासी सुधीर उर्फ सुदेश से की थी। पुत्री रेखा व दामाद सुदेश में जब भी कहासुनी होती थी, तब स्वदेश के बाबा राम बहादुर सिंह, मां लड़ैती सुदेश की तरफदारी करती थी। उसे समझाया नहीं करती थीं। 16 मई 2017 की सुबह दस बजे सुदेश ने वादी के फोन पर कॉल करके बताया कि उसने घर के भीतर रेखा की गोली मारकर हत्या कर दी है, तुम लोग जल्दी आ जाओ।
इस पर मायके से काफी लोग रेखा की ससुराल पहुंच गए। कमरे में रेखा का शव पड़ा हुआ था। शव के पास एक 315 बोर का तमंचा और खोखा कारतूस पड़ा था। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने विवेचना की। विवेचना पूरी कर सुधीर उर्फ सुदेश के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय महिला संरक्षण राजीव सिंह ने सुधीर उर्फ सुदेश को गैर इरादतन हत्या का दोषी पाते हुए सात साल कारावास और आठ हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है।
आयुध अधिनियम में भी सुनाई गई सजा
हत्या की इस वारदात में आरोपी सुधीर उर्फ सुदेश के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत भी एक मुकदमा अलग से दर्ज किया गया था। उसके पास से हत्या में इस्तेमाल तमंचा बरामद होने पर यह कार्रवाई बिलसंडा पुलिस द्वारा की गई थी। इस मुकदमे में भी उसे दोषी पाया गया है। न्यायालय ने आयुध अधिनियम के तहत तीन हजार रुपये जुर्माना और चार साल की सजा सुनाई है। सभी सजाएं साथ चलेंगी। आयुध अधिनियम और गैर इरादतन हत्या दोनों में कुल आठ हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।
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