अयोध्या: योगी का मंदिर बनवाने वाले का एक और झूठ आया सामने, फर्जी निकला यह बड़ा दावा

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इंदुभूषण पांडेय, अमृत विचार, अयोध्या। अयोध्या में योगी जी का मन्दिर बनवाने वाले प्रभाकर मौर्य की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला अब योगी की मूर्ति से जुड़ा है। दरअसल मन्दिर में लगी मूर्ति जयपुर में नहीं बल्कि प्रदेश की राजधानी से सटे जनपद बाराबंकी के एक छोटे से गांव …

इंदुभूषण पांडेय, अमृत विचार, अयोध्या। अयोध्या में योगी जी का मन्दिर बनवाने वाले प्रभाकर मौर्य की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला अब योगी की मूर्ति से जुड़ा है। दरअसल मन्दिर में लगी मूर्ति जयपुर में नहीं बल्कि प्रदेश की राजधानी से सटे जनपद बाराबंकी के एक छोटे से गांव इंधौलिया में बनी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मन्दिर बनवाने वाले प्रभाकर मौर्य ने दावा किया था कि यह मूर्ति जयपुर से तकरीबन 50 हजार रुपये में बनवाई गई है।

प्रभाकर ने मूर्ति बनाने वाले बाराबंकी के आर्टिस्ट सुमित कुमार को उसका मेहनताना भी नहीं दिया है। सुमित का आरोप है कि प्रभाकर ने उन्हें सिर्फ मूर्ति की लागत दी थी और मेहनताना देने की बात आई तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलवाने और फेमस करा देने की बात कही थी।

सुमित ने अमृत विचार को बताया कि वह लखनऊ विश्वविद्यालय में बीएफए का छात्र था, लेकिन अपने काम को धार देने के लिए पढ़ाई छोड़ दी। उसने बताया कि अयोध्या के एक संत को उनका पोर्ट्रेट बनाकर दिया था। संत ने उसे फेसबुक पर डालकर लोगों से मुझसे ही पोर्ट्रेट बनवाने की अपील की थी। इसके बाद अयोध्या के थाना पूराकलंदर क्षेत्र स्थित मौर्य का पुरवा निवासी प्रभाकर मौर्य ने उनसे संपर्क किया था। सुमित के अनुसार तकरीबन एक वर्ष पहले प्रभाकर ने उनसे योगी की मूर्ति बनाने को कहा था।

हालांकि सुमित ने यह कहते हुए मना कर दिया था कि म्यूरल आर्ट का जानकार है। मूर्ति नहीं बना पायेगा, लेकिन प्रभाकर लगातर सुमित को मूर्ति बनाने के लिए प्रोत्साहित करते रहे। इसके बाद सुमित ने 28 अप्रैल को मूर्ति बनाने का काम शुरू किया। मिट्टी और पीओपी से बनाने के बाद फाइवर से ढालकर तकरीबन दो माह में मूर्ति तैयार कर दी। आरोप है कि लागत के 22 हजार रुपये सुमित को मिले थे, जबकि 10 हजार रुपये मेहनताना अब भी बाकी है। सुमित ने बताया कि महीना भर पहले से प्रभाकर अपनी सफारी कार से आये थे। हम लोग मूर्ति को कार में पीछे डालकर अयोध्या में प्रभाकर के गांव ले गए थे।

मूर्ति का नाम पहले था “कलयुग का राम’
बाराबंकी के नवाबगंज तहसील के एक छोटे से गांव के रहने वाले सुमित ने इस मूर्ति को थ्रीडी टच भी दिया था। उन्होंने बताया कि गांव में मूर्ति सेट करते समय फ्रेम ठीक से सेट नहीं हो रहा था, जिसके बाद उसे काटा गया, जिस पर लिखा था कलयुग का राम। मूर्ति 5 फ़ीट 4 इंच की है।

नाम व सम्मान न मिलने से दुखी हैं सुमित
सुमित का कहना है कि मेरी बनाई योगी की मूर्ति की हर जगह चर्चा है, लेकिन एक बात परेशान करती है कि प्रभाकर ने मूर्ति को जयपुर के बता दिया। मेहनताना और मुख्यमंत्री से न मिल पाने का उतना गम नहीं है, जितना प्रभाकर भाई ने मूर्ति को जयपुर के बताते हुए दिया है। अगर मेरा नाम ले लिया होता तो मेरे किसान पिता का सीना भी चौड़ा हो जाता। मुख्यमंत्री से मिलाने का झांसा देकर एक बार मेरा आधार कार्ड भी लिया था।

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