जालसाजी में भी माहिर है विकास दुबे, खुले कई चौंकाने वाले राज
कानपुर। उत्तर प्रदेश में कानपुर के चौबेपुर क्षेत्र में आठ पुलिसकर्मियों की जान लेने वाला हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की गिरफ्तारी में जुटी पुलिस के हाथ कई ऐसी चीजें लगी हैं जो उसके शातिर होने की तस्कीद करती हैं। पुलिस सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि विकास दुबे ने अपने घर में एक वायरलेस कंट्रोल रूम …
कानपुर। उत्तर प्रदेश में कानपुर के चौबेपुर क्षेत्र में आठ पुलिसकर्मियों की जान लेने वाला हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की गिरफ्तारी में जुटी पुलिस के हाथ कई ऐसी चीजें लगी हैं जो उसके शातिर होने की तस्कीद करती हैं। पुलिस सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि विकास दुबे ने अपने घर में एक वायरलेस कंट्रोल रूम भी बना रखा था। इसका इस्तेमाल वह अपने गुर्गों से संपर्क में बने रहने के लिए करता था।
सबसे खास बात तो पुलिस को यह पता चली है कि उसका हर एक साथी उसके इशारे पर काम करता था जिसके चलते प्रशासन और आम लोगों के साथ धोखाधड़ी करने के लिए उसने घर के नौकर-नौकरानी से लेकर गुर्गों तक के कई पहचान पत्र भी बनवा रखे थे।
सूत्रों के अनुसार विकास के ढहाए गए किले से पुलिस के हाथ लगे पहचान पत्रों, फोटो किसी की और नाम, पता किसी और का है। इन पहचान पत्रों से विकास जमीनों के बैनामों से लेकर वाहनों की खरीद फरोख्त में खेल करता था। विकास ने अपने गुर्गों, रिश्तेदारों और नौकर-नौकरानी के नाम से कई चल और अचल संपत्ति खरीद रखी थी और उसके इस जालसाजी के धंधे में उसका हर एक साथी बराबर से उसका साथ दे रहा था।
मामले को लेकर आईजी रेंज कानपुर मोहित अग्रवाल का कहना है कि प्रथम दृष्टि इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल धोखाधड़ी और जालसाजी के लिए किया जाना प्रतीत होता है।साक्ष्य जुटाने के लिए बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से भी संपर्क किया जा रहा है।
