कन्नौज : भक्त और भगवान का नाता ही सच्चा : आचार्य
अमृत विचार, कन्नौज । भक्त और भगवान का नाता ही सच्चा है। इससे मजबूत संबंध कोई और नहीं। यह उद्गार यहां सन्मार्ग संस्था के देवी पंडाल में चल रही भागवत कथा में आचार्य ब्रजेश द्विवेदी ने व्यक्त किए। वे राजा बलि और भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा कह रहे थे। उन्होंने कथा में …
अमृत विचार, कन्नौज । भक्त और भगवान का नाता ही सच्चा है। इससे मजबूत संबंध कोई और नहीं। यह उद्गार यहां सन्मार्ग संस्था के देवी पंडाल में चल रही भागवत कथा में आचार्य ब्रजेश द्विवेदी ने व्यक्त किए। वे राजा बलि और भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा कह रहे थे।
उन्होंने कथा में बताया कि जब राजा बलि ने तीनों लोक जीत लिए तो भगवना वामन का रूप धरकर दान लेने पहुंचे और तब भगवान ने दो पग में तीनों लोग नाप लिए।
तीसरा पग रखने की जगह पूछने पर बलि ने अपना मस्तक आगे कर दिया। इसके बाद जब वरदान की बारी आई तो बलि ने भगवान को अपने साथ सुतल लोक में चलने और पहरेदारी करने के लिए कहा। चूंकि भगवान भक्त के आधीन होते हैं सो भगवान वहीं रह गए।
उधर लक्ष्मी जी परेशान हो गईं कि महीनों बाद भी भगवान क्यों नहीं आए। उन्होंने सभी जगह ढूंढा लेकिन भगवान नहीं मिले। इसके बाद उनकी भेंट नारद से हुई तो उन्हें असली बात का पता चला। इस पर वे साध्वी का भेस धरकर सुतल लोक पहुंच गईं।
यहां भगवान विष्णु ने उन्हें आंखों की भाषा से समझाया कि वे भक्त के आधीन हैं। इस पर वे बलि की धर्म बहन बनकर रहने लगीं। इसके बाद जब रक्षाबंधन का पर्व आया तो उन्होंने राजा को रक्षासूत्र बांधने के बाद भगवान को बलि से मुक्त करा लिया। कथा के अंत में आरती व प्रसाद वितरण किया गया।
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