बरेली: सीबीगंज के साथ आईवीआरआई की जमीन Zoo के लिए विकल्प, प्रस्ताव भेजा
बरेली, अमृत विचार। वन मंत्री अरुण कुमार की पहल पर वन विभाग के अधिकारी बरेली में जू ( चिड़ियाघर ) की संभावनाएं तलाश रहे हैं। इसके लिए सीबीगंज में करीब 60 हेक्टेयर भूमि चिन्हित कर ली गई है। वहीं दूसरी उपयुक्त जमीनों की भी तलाश की जा रही है। आईवीआरआई में भी चिड़ियाघर को लेकर …
बरेली, अमृत विचार। वन मंत्री अरुण कुमार की पहल पर वन विभाग के अधिकारी बरेली में जू ( चिड़ियाघर ) की संभावनाएं तलाश रहे हैं। इसके लिए सीबीगंज में करीब 60 हेक्टेयर भूमि चिन्हित कर ली गई है। वहीं दूसरी उपयुक्त जमीनों की भी तलाश की जा रही है। आईवीआरआई में भी चिड़ियाघर को लेकर संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। अफसरों के अनुसार इस संबंध में आईवीआरआई के प्रशासन से बात हुई है। उनकी अनुमति के बाद ही इस विकल्प पर काम किया जाएगा। वन संरक्षक द्वारा प्रभागीय वनाधिकारी से एक अंतरिम प्रस्ताव सीबीगंज में जू बनाने को लेकर मांगा गया था।
जमीन की तलाश करने में अधिकारियों की प्राथमिकता है कि जू शहर से नजदीक होना चाहिए। जिसमें अब तक विभाग को करीब 60 हेक्टेयर में सीबीगंज स्थित खलीलपुर ब्लाक की जमीन सबसे मुफीद लगी है। अधिकारियों के मुताबिक यह जमीन वन विभाग की रिसर्च विंग की है। जिसके लिए फारेस्ट रिसर्च विंग की मंजूरी मांगी गई है। इसके अलावा वन विभाग द्वारा अन्य जगह चिड़ियाघर बनाए जाने को लेकर कवायद की जा रही है।
प्रभागीय वनाधिकारी से केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण भारत सरकार के दिशा-निर्देश के अनुसार प्रस्तावित जू के लिए भूमि की उपलब्धता, स्वामित्व, क्षेत्रफल आदि की जानकारी मांगी गई थी। इसके अलावा एक अंतरिम प्रस्ताव बनाकर देने को कहा गया है, जिसमें चयनित की गई जमीन पर कहां-कहां बाड़े बनाए जाने हैं और कौन-कौन से वन्यजीव चिड़ियाघर में रखे जाएंगे। हालांकि, अभी तक जमीन की तलाश वन विभाग के लिए पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। आईवीआरआई कैंपस में भी चिड़ियाघर बनाने को प्रस्ताव भेजा गया है। आईवीआरआई में चिड़ियाघर विकसित करने का प्रस्ताव नया नहीं है। कुछ साल पहले भी कई अधिकारियों ने प्रयास किया, मगर वक्त से साथ ठंडे बस्ते में चला गया।
जू के लिए सीबीगंज में चिन्हित की गई जमीन का प्रस्ताव भेजा था। यह वन विभाग के रिसर्च विंग की जमीन है। इसके अलावा आईवीआरआई कैंपस के लिए भी प्रस्ताव भेजा गया है। आईवीआरआई वालों से भी इस पर चर्चा की जाएगी। आईवीआरआई प्रशासन से मंजूरी मिली यहां भी जू बनाने की संभावनाएं हैं-ललित कुमार वर्मा, मुख्य वन संरक्षक, रुहेलखंड जोन।
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