Gandhi Jayanti 2022 : महात्मा गांधी जी का मुरादाबाद से था गहरा नाता, ब्रजरतन लाइब्रेरी के पुनरुद्धार कार्यक्रम में हुए थे शामिल

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

आशुतोष मिश्र, अमृत विचार। मोहनदास करमचंद गांधी (महात्मा गांधी) का मुरादाबाद से गहरा नाता रहा है। इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। वह ब्रजरतन लाइब्रेरी के पुनरुद्धार समारोह में शामिल हुए थे। जबकि, अंग्रेजों के खिलाफ छिड़ी वैचारिक लड़ाई को धार देने वह यहां आए थे। तब यहां टाउन हॉल के मैदान में कांग्रेस की आम सभा …

आशुतोष मिश्र, अमृत विचार। मोहनदास करमचंद गांधी (महात्मा गांधी) का मुरादाबाद से गहरा नाता रहा है। इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। वह ब्रजरतन लाइब्रेरी के पुनरुद्धार समारोह में शामिल हुए थे। जबकि, अंग्रेजों के खिलाफ छिड़ी वैचारिक लड़ाई को धार देने वह यहां आए थे। तब यहां टाउन हॉल के मैदान में कांग्रेस की आम सभा को संबोधित किया था। वैसे तो वर्ष 1930 और 1942 के आंदोलनों में शहर चर्चा में रहा। जिसमें स्वतंत्रता संग्राम के संचालक यहां पहुंचे थे। लेकिन, महात्मा गांधी की प्रत्यक्ष उपस्थिति के लिखित प्रमाण नहीं हैं।

इतिहासकार डॉ.अजय अनुपम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और मुरादाबाद से उनके रिश्ते की विस्तार से चर्चा करते हैं। कहते हैं कि साल 1920 और 1921 में उनके मुरादाबाद आने के लिखित प्रमाण हैं। उस जमाने में ब्रजरतन खन्ना का परिवार यहां सुशिक्षित, संपन्न और सनाढ्य माना जाता था। ब्रजरतन के नाम से लाइब्रेरी की बुनियाद वर्ष 1912 में यह रखी गई। तत्कालीन कलेक्टर जेई लट्टन ने उसकी आधारशिला रखी। 24 जून 1912 को लाइब्रेरी का उद्घाटन हुआ। जिसके दूसरे तल यानी भवन के पुनरुद्धार समारोह में महात्मा गांधी ने हिस्सा लिया। उनके नाम का शिलालेख लाइब्रेरी में गवाही है। जबकि 9,10 और 11 अक्टूबर 1920 को स्वतंत्रता संग्राम के लड़ाके यहां एकत्र हुए थे।

तत्कालीन नार्थ, ईस्ट, वेस्ट, फ्रंटियर और अवध राज्य के प्रतिनिधि एकत्र हुए थे। संयुक्त कांग्रेस की वार्षिक आम सभा हुई थी। तब अब्दुल सलाम गर्ल्स कॉलेज में कांग्रेसी प्रतिनिधि ठहरे थे। जबकि, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, डॉ.राजेंद्र प्रसाद, एनी बेसेंट, मोहम्मद अली जिन्ना और शौकत अली जैसे लोग महाराजा थिएटर में रुके थे। उसी कार्यक्रम में शहर के टाउन हाल के मैदान में आम सभा हुई थी, जिसे महात्मा गांधी ने संबोधित किया था। इतिहास के पन्नों में यह बात दर्ज है। आजादी के दीवानों की मुरादाबाद में वह ऐतिहासिक सभा थी, जिसमें 30,000 तक लोगों के एकत्र होने की बातें कही गईं हैं।

प्रो.अनुपम कहते हैं कि वह आम सभा ऐतिहासिक थी। महात्मा गांधी सहित अन्य विभूतियों को बैलगाड़ी पर बिठाकर सभा स्थल तक लाया गया, जिसमें कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने गाड़ी खींचने में स्वयं की भूमिका साबित की थी। यानी कि महात्मा गांधी को पाकर उत्साहित लोग और समर्थकों ने स्वयं से गाड़ी खींची थी। जबकि 1930 में मुरादाबाद में ऐतिहासिक सभा का जिक्र आता है। 1942 के अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में यह शहर चर्चा में रही। लेकिन, इन दोनों अनुष्ठानों में महात्मा गांधी के शामिल होने के लिखित प्रमाण नहीं हैं। जबकि दो बार की उनकी यात्रा यह साबित करती है कि गांधी मुरादाबाद से गहरे जुड़े थे।

ये भी पढ़ें : स्वच्छ सर्वेक्षण में मुरादाबाद नगर निगम को मिला प्रदेश में 8वीं, देश में 95वीं रैंक

संबंधित समाचार

टॉप न्यूज

गंगाराम की मौत पर रोया पूरा गाँव, नहीं जला घर का चूल्हा, 130 सालों तक तालाब में रहने की क्या है कहानी; NCERT के पाठ्यक्रम में शामिल
NEET विवाद पर छात्रों के समर्थन में आए वरुण धवन और नोरा फतेही, बोले- हर छात्र निष्पक्ष और भरोसेमंद व्यवस्था का हकदार
Parliament Monsoon Session Day 5: लोकसभा की कार्यवाही 27 जुलाई तक स्थगित, किरण रिजिजू बोले- NEET पर चर्चा जरूरी, देश को सही संदेश जाना चाहिए
''छात्रों को धमकाने की हिम्मत कैसे हुई?'' , राहुल गांधी का सरकार पर हमला, कहा- छात्रों को लोकतांत्रिक अधिकारों से नहीं डराया जा सकता
लखनऊ में IGRS शिकायतों पर बड़ा एक्शन: 60% शिकायतकर्ता असंतुष्ट, डीएम ने 25 अधिकारियों का जून का वेतन रोका