कानपुर हादसा: परिजन बोले पहले दोषी ड्राइवर को पकड़ो फिर उठेगी अर्थी, मान-मनौव्वल करते रहे अधिकारी और नेता

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कानपुर, अमृत विचार। कोरथा गांव में उस समय अधिकारियों और नेताओं के हांथ पांव फूल गए जब एक परिवार ने शव उठाने को लेकर मना कर दिया। परिवार में अलग-अलग पांच लोगों की दर्दनाक मौत के बाद परिजन पुलिस प्रशासन के अधिकारियों और नेताओं से भिड़ गए। परिजन पहले मृतक के बेटे के आने फिर …

कानपुर, अमृत विचार। कोरथा गांव में उस समय अधिकारियों और नेताओं के हांथ पांव फूल गए जब एक परिवार ने शव उठाने को लेकर मना कर दिया। परिवार में अलग-अलग पांच लोगों की दर्दनाक मौत के बाद परिजन पुलिस प्रशासन के अधिकारियों और नेताओं से भिड़ गए। परिजन पहले मृतक के बेटे के आने फिर मुआवजे और फिर दोषी ड्राइवर को पकड़ने की मांग करने लगे। जिसके बाद कमिश्नर राजशेखर और अकबरपुर के सांसद देवेंद्र भोले परिवार को मनाते रहे। जब परिवार नहीं माना तो डीएम कानपुर विशाख जी, नरवल एसडीएम नरवल गुलाब चंद्र भी परिवार को समझाते रहे। अंत में घाटमपुर विधायक सरोज कुरील और एडीजी जोन कानपुर भानु भाष्कर पहुंचे जिनके आश्वासन पर परिवार माना।

पीड़ित बिहारी ने अमृत विचार को बताया कि परिवार में भाभी तारादेवी 40, केशकली 42, रानी देवी 45 व नातिन पारुल 3 और भतीजी किल्लो 12 की मौत हो गई है। आरोप लगाया कि घटना के समय सारे अधिकारी वीडियो बना रहे थे कोई मदद नहीं करने आया। यहां तक की दोषी ड्राइवर राजू को भी पुलिस और अधिकारी पकड़ नहीं सके हैं। सभी अधिकारी जल्दबाजी कर रहे हैं कि जल्दी से अर्थी उठ जाए। परिवार के पंकज ने कहा कि सरकार ऐलान कर देती है लेती मुआवजा देने में कई चक्कर लगवाते हैं। कहा कि पहले मुआवजा दो तब शव उठेंगे। वहीं परिवार के एक अन्य सदस्य ने कहा कि केशकली का एक बेटा दिल्ली में रहता है वह ट्रक से आ रहा है। वह आ जाएगा तो शव उठा देंगे। करीब डेढ़ घंटे तक अधिकारी और बीजेपी नेता परिजनों से मान मनौव्वल करते रहे। जिसके बाद परिवार आश्वासन मिलने पर शव उठाने को राजी हो गया। परिजनों की रजामंदी मिलने के बाद अधकारियों ने कई एंबुलेंस लगाकर बारी-बारी शव को ड्योढी घाट पहुंचाया।

पैसा मिलता है, मानवता होती तो मदद करते
नरवल एसडीएम गुलाब चंद्र और एक परिजन के बीच जमकर बहस हो गई। एसडीएम ने कहा कि रात से लगे हैं आप लोग देख रहे हैं, इसपर परिजन ने कहा कि पैसा मिलता है कोई फ्री में नहीं लगे हो, मानवता होती तो रात में वीडियो नहीं बनाते मदद करते। कहा कि सब अधिकारी चाह रहे है कि जल्दी से शव गांव से हट जाएं। जिसके बाद कई अन्य अधिकारियों ने बीच में आकर परिजनों को शांत कराया।

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