बरेली: नाम भर की दवाईयों से काम चला रहा शहर

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। कोरोना की दहशत के बीच यह बात चौंकाने वाली है कि शहर में दवाओं की बिक्री में आश्चर्यजनक स्तर तक कमी आई है। दवा कारोबारियों के मुताबिक लाकडाउन के दौरान हाई ब्ल्ड प्रेशर, डायबिटीज और हदय रोगों के साथ एंटीबायोटिक और आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री दो से तीन गुना तक बढ़ी थी। …

बरेली, अमृत विचार। कोरोना की दहशत के बीच यह बात चौंकाने वाली है कि शहर में दवाओं की बिक्री में आश्चर्यजनक स्तर तक कमी आई है। दवा कारोबारियों के मुताबिक लाकडाउन के दौरान हाई ब्ल्ड प्रेशर, डायबिटीज और हदय रोगों के साथ एंटीबायोटिक और आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री दो से तीन गुना तक बढ़ी थी। लोगों में डर था कि कहीं दवा की दुकानें भी बंद न हो जाएं।

कोरोना से बचने के लिए लोगों ने विटमिन सी, पैरासिटामॉल और जुकाम- खांसी और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं की भी बगैर जरूरत बड़े पैमाने पर खरीद की। मगर लाकडाउन के दो हफ्ते गुजरते- गुजरते दवाओं की बिक्री का ग्राफ धीरे-धीरे नीचे आने लगा। लाकडाउन होने के बाद शुरुआती के हफ्तों में दवाओं की खरीदारी की सेल तीन गुना बढ़ गई थी।

हर किसी ने दवाओं का स्टॉक लगा लिया था लेकिन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष दुर्गेश खटवानी के मुताबिक अब प्रतिदिन एक मेडिकल स्टोर पर पांच से आठ हजार रुपये की सेल रह गई है। फिलहाल दवाओं की कोई भी कमी नहीं है। हर दवा की पूर्ति की जा रही है।

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