बरेली: दशहरे से होता है ईंट पथाई का काम, हड़ताल से लगा ब्रेक
बरेली, अमृत विचार। ईंट भट्ठा मालिकों की हड़ताल चल रही है। अगर यही स्थिति रही तो नवंबर व दिसंबर से ईंट मिलनी बंद हो जाएगी। इससे निर्माण क्षेत्र में मुश्किलें बढ़ जाएंगी। घर व इमारतों का निर्माण कार्य प्रभावित होगा। दशहरे के बाद से नई ईंट की पथाई का काम शुरू हो जाता है, मगर …
बरेली, अमृत विचार। ईंट भट्ठा मालिकों की हड़ताल चल रही है। अगर यही स्थिति रही तो नवंबर व दिसंबर से ईंट मिलनी बंद हो जाएगी। इससे निर्माण क्षेत्र में मुश्किलें बढ़ जाएंगी। घर व इमारतों का निर्माण कार्य प्रभावित होगा। दशहरे के बाद से नई ईंट की पथाई का काम शुरू हो जाता है, मगर अभी तक भट्ठों में इसकी कोई तैयारी नहीं हुई है। बाहर से आने वाले मजदूर भी नहीं बुलाए गए हैं। अभी पुराना स्टाक चल रहा है। नया उत्पाद बंद है। हड़ताल चलती रही और कोई समझौता नहीं हुआ तो जनवरी के बाद नई ईंट मिलना बंद हो सकती हैं। इसका असर निर्माण प्रोजेक्ट पर पड़ेगा।
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ईंट भट्ठा मालिकों की देशव्यापी हड़ताल जारी है। जीएसटी बढ़ने, कोयला महंगा मिलने और नई गाइडलाइन के कारण पुराने लोगों को काम करने में परेशानी हो रही है। इसी मुद्दे पर सरकार से कई दौर की वार्ता के बाद अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है। पिछले माह भट्ठा मालिक ईंट की बिक्री बंद कर तीन दिन हड़ताल पर रहे। अब ईंट निर्माता पुराना उत्पाद निकाल रहे हैं, मगर नए उत्पादन को लेकर कोई तैयार नहीं करते दिख रहे हैं।
ईंट निर्माता संजय कुमार बताते हैं कि निर्माण प्रोजेक्ट पर इसका असर पड़ने लगा है। बीडीए के प्रोजेक्टों पर ईंटों की खपत है। ठेकेदार परेशान हैं। जिस भाव में पहले ईंट आ रही थी, अब नहीं मिल रही है। मकान बनाने वाले बिल्डर या तो समझौता करेंगे या दाम बढ़ाएंगे। इसका असर ग्राहक की जेब पर भी पड़ेगा।
ईंट निर्माता एसोसिएशन के महासचिव कैलाश वाधवानी बताते हैं कि एक माह का माल बचा है, जो नवम्बर तक खत्म हो जाएगा। मांगों पर सुनवाई नहीं होती है तो इसका असर जनवरी में दिखने लगेगा। ईंट की कमी होना तय है। पहले जीएसटी एक फीसदी थी, उसे छह और छह वाली 12 फीसदी जीएसटी कर दी गई है। कोयला महंगा हो गया है। ईंट के रेट बढ़ रहे हैं।
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