कानपुर: मिलों की भूमि पर स्थापित होंगे औद्योगिक क्षेत्र, यूपीसीडा करा रहा आंकलन
कानपुर, अमृत विचार। बंद पड़ी कताई और यार्न मिलों की भूमि बहुत जल्द ही उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) को मिल जाएगी। 19 मिलों की निष्प्रयोज्य पड़ी 15 सौ एकड़ भूमि मिल जाने से प्राधिकरण के पास बड़ा लैंड बैंक होगा। इस भूमि पर औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की जाएगी। प्रबंधन की कोशिश है …
कानपुर, अमृत विचार। बंद पड़ी कताई और यार्न मिलों की भूमि बहुत जल्द ही उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा)
को मिल जाएगी। 19 मिलों की निष्प्रयोज्य पड़ी 15 सौ एकड़ भूमि मिल जाने से प्राधिकरण के पास बड़ा लैंड बैंक होगा। इस भूमि पर औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना की जाएगी। प्रबंधन की कोशिश है कि एक अगले साल होने वाली इंवेस्टर्स समिट से पहले भूमि मिल जाए ताकि जिन औद्योगिक समूहों से करार हो तत्काल उन्हें भूमि दिखा दी जाए। लेआउट प्लान बनाकर वहां विकास कार्य भी शुरू किया जा सके ताकि जल्द से जल्द भूमि का आवंटन हो सके।
प्रदेश में स्टेट यार्न कंपनी लिमिटेड, स्पिनिंग कंपनी लिमिटेड, राज्य वस्त्र निगम और सहकारी कताई मिल्स संघ लिमिटेड की 19 मिलें हैं। ये मिलें बंद पड़ी हैं। भूखंडों पर अब अतिक्रमण भी हो रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भूमि का उपयोग औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए करने का आदेश दिया है। जल्द ही शासन स्तर पर यह तय हो जाएगा कि भूमि का हस्तांतरण कैसे होगा। प्रबंधन को कौन- कौन सी भूमि सर्किल रेट पर मिलेगी और किन मिलों की भूमि का बकाया राशि प्रबंधन देगा।
स्टेट यार्न कंपनी लिमिटेड कानपुर की प्रयागराज के मेजा, बांदा और बलिया के रसड़ा में मिल स्थापित हैं। यूपी स्पिनिंग कंपनी लिमिटेड की रायबरेली, बाराबंकी, मऊ में कताई मिल स्थापित हैं। इसी प्रकार राज्य वस्त्र निगम लिमिटेड कानपुर की झांसी, हरदोई के संडीला और मेरठ के परतापुर में वस्त्र मिल हैं। सहकारी कताई मिल्स संघ लिमिटेड की फर्रुखाबाद के कंपिल, बुलंदशहर, फतेहपुर, बरेली के बहेड़ी, अमरोहा, बिजनौर के नगीना , गाजीपुर के बहादुरगंज , संत कबीरनगर के मगहर, सीतापुर के महमूदाबाद और प्रयागराज के मउआईमा में मिल हैं। इन मिलों की भूमि निष्प्रयोज्य पड़ी है।
मिलों के प्रबंधन के पास अब इतना बजट भी नहीं है कि वह मिलों में फिर से काम शुरू करा सके। यही वजह है सरकार ने मिलों की भूमि यूपीसीडा को देने का निर्णय लिया है। यूपीसीडा की ओर से मिलों की संपत्ति, बैंकों और कर्मचारियों के बकाया देयों आदि का आंकलन कराया जा रहा है। यह कार्य अक्टूबर में ही पूरा हो जाएगा। इसी के साथ ही तय होगा कि किन मिलों की भूमि सर्किल रेट पर मिल जाएगी। किसकी भूमि नि:शुल्क मिलेगी और बैंकों या कर्मचारियों का जो बकाया है उसे यूपीसीडा अदा करेगा या फिर शासन स्तर से उसकी अदायगी की जाएगी।
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