ट्रस्ट की बैठक : परकोटे में बनेगा पंचदेव का मंदिर
अमृत विचार, अयोध्या। प्रत्येक 40 दिन पर होने वाली निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक इस बार राम जन्मभूमि परिसर के विश्वामित्र भवन में ही संपन्न हुई। बैठक में परकोटे में पंचदेव का मंदिर बनाने, रामचरित मानस के रचयिता तुसलीदास की प्रतिमा स्थापित करने, ट्रस्ट के खातों का डिजिटिलाइजेशन करने का निर्णय लिया गया। साथ …
अमृत विचार, अयोध्या। प्रत्येक 40 दिन पर होने वाली निर्माण समिति की दो दिवसीय बैठक इस बार राम जन्मभूमि परिसर के विश्वामित्र भवन में ही संपन्न हुई। बैठक में परकोटे में पंचदेव का मंदिर बनाने, रामचरित मानस के रचयिता तुसलीदास की प्रतिमा स्थापित करने, ट्रस्ट के खातों का डिजिटिलाइजेशन करने का निर्णय लिया गया। साथ ही ट्रस्ट की फाइनल बाइलॉज पर पदाधिकारियों ने हस्ताक्षर किए। अंतिम दिन मैराथन बैठक के बाद पदाधिकारियों ने आसपाल के क्षेत्रों का स्थलीय जायजा भी लिया।
अमूमन निर्माण समिति की दूसरे दिन की बैठक सर्किट हाउस में होती रही है, हालांकि इस बार यह बैठक परिसर स्थित विश्वामित्र भवन में निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में ही संपन्न हुई। बैठक के बारे में जानकारी देते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि परकोटे में कुल छह मंदिर बनने हैं।
एक मंदिर में भगवान राम के पूर्वज सूर्य सात घोड़ों द्वारा खींचे जा रहे रथ पर सवार दिखेंगे। पंचदेव पूजन की परंपरा मुताबिक गणपति, भगवती, शंकर, हनुमान का मंदिर बनेगा। तय हुआ है कि जहां भगवान की रसोई बनेगी, वहां उत्तर दिशा में अन्नपूर्णा जी का विग्रह होगा। टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज के साथ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खाते के डिजिटिलाइजेशन और डोनेशन मैनेजमेंट सिस्टम पर अनुबंध हुआ है।
भूतल पर स्थापित होगी बाल स्वरूप की मूर्ति
चंपत राय ने बताया कि परिसर में बाल स्वरूप में स्थापित होने वाले रामलला की मूर्ति पर भी विचार विमर्श हुआ, यह मूर्ति भूतल पर स्थापित होगी और आकृति, लंबाई, चौड़ाई, मोटाई इस प्रकार रहेगी, जिससे बाल स्वरूप की कोमलता चेहरे और उंगलियों से प्रकट हो तथा नेत्र और चरण भक्तों को दिखे।
स्वरूप जीवंत दिखे इसके लिए पत्थर ढूंढ लिया गया है। वैज्ञानिकों से परामर्श कर ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि राम नवमी को दोपहर 12 बजे सूर्य देवता बालरूप राम के भृकुटि और मस्तक को सीधे प्रकाशित करे। छह माह चली कवायद के बाद तैयार ट्रस्ट के फाइनल बाइलॉज पर हस्ताक्षर हुआ है।
फसाड लाइट पर भी हुई चर्चा
महासचिव ने बताया कि परिसर में महर्षि बाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि अगस्त और निषादराज, माता शबरी व अहिल्या तथा जटायु की मूर्ति लगनी है। जटायु की मूर्ति कुबेर टीला पर लगेगी। किले की सुरक्षा और चारों ओर से चढ़ने की व्यवस्था का जिम्मा इंजीनियरों को सौंपा गया है।
इसके साथ ही परिसर में लगने वाली फसाड लाइटों पर भी चर्चा हुई है। एहतियात बरती जा रही है कि तेज प्रकाश से आंखें न चौंधियाएं और मंदिर का भीतरी और बाहरी स्वरूप प्रकाशित हो।
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