बरेली: नगर निगम सीमा की किला नदी उफनाई, आबादी में घुसा पानी तो मुश्किलों से घिरे लोग

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बरेली, अमृत विचार। चार दिन की बारिश के बाद नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने से आमजन की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। बहेड़ी, शेरगढ़, फरीदपुर समेत कई ग्रामीण क्षेत्रों में रामगंगा, कैलाश, बहगुल नदियों का जलस्तर बढ़ने से हजारों लोग दिक्कतें झेल रहे हैं। अब नगर निगम सीमा क्षेत्र की किला नदी का एकाएक जलस्तर इतना …

बरेली, अमृत विचार। चार दिन की बारिश के बाद नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने से आमजन की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। बहेड़ी, शेरगढ़, फरीदपुर समेत कई ग्रामीण क्षेत्रों में रामगंगा, कैलाश, बहगुल नदियों का जलस्तर बढ़ने से हजारों लोग दिक्कतें झेल रहे हैं। अब नगर निगम सीमा क्षेत्र की किला नदी का एकाएक जलस्तर इतना बढ़ गया कि सैदपुर हाकिंग, किला छावनी समेत अन्य क्षेत्र की आबादी में पानी घुस गया।

इससे बड़ी संख्या में घरों के चारों ओर गंदा पानी भर गया। सोमवार सुबह से हजारों लोग गंदे पानी की वजह से परेशान हैं। उन्हें घरों से बाहर जाने में दिक्कतें हो रही हैं। बच्चों और बुजुर्गों को अधिक परेशानी हो रही है। दोपहर में स्कूलों की छुट्टी होने पर अभिभावक बच्चों को स्कूल से लाने के लिए गंदे पानी से होकर गुजरे। आबादी क्षेत्रों में नदी का पानी घुसने पर बाढ़ खंड की ओर से प्रशासन व नगर निगम को पत्र भेजकर जानकारी दे दी गई है, लेकिन किसी स्तर से कोई अधिकारी दुश्वारियां झेल रहे लोगों की पीड़ा जानने नहीं पहुंचा।

किला छावनी क्षेत्रांतर्गत काली धाम मंदिर क्षेत्र, सैदपुर हॉकिंस सहित आसपास के कई इलाकों में बीते दिनों लगातार बारिश के चलते नदी का पानी आ गया था। लोगों को उम्मीद थी कि कुछ घंटों में यह पानी कम हो जाएगा, लेकिन एक हफ्ता बीतने के बाद भी क्षेत्र में 3 से 4 फीट तक पानी जमा हुआ है। बहुत जरूरत पड़ने पर ही लोग पैदल जलजमाव के क्षेत्र को पार कर रहे हैं। यहां से कोई भी बाइक या अन्य वाहन निकलना असंभव है। यहां के आसपास के कई घर ऐसे हैं, जिनका भूतल बराबर है, जो पुराने बने हुए हैं। इस कारण उन घरों के आंगन व कमरों तक में पानी भरा हुआ है। बीते एक या दो वर्ष पूर्व बने मकान, जिनके भूतल से ऊपर बने हुए हैं, उन घरों के आगे भारी जलजमाव है।

बच्चों की शिक्षा व आमजनों की सुरक्षा की बढ़ी चिंता
क्षेत्र में जलजमाव की विकराल स्थिति के कारण कुछ जगह एक हफ्ते से बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। वहीं, कुछ लोग जलभराव के बीच बच्चों को गोद में लेकर स्कूल पहुंचा रहे हैं और उन्हें लेकर आ रहे हैं। क्षेत्र में ठेला, फेरी आदि का रोजगार करने वाले दुकानदारों के लिए भी जलभराव नुकसानदायक साबित हो रहा है।

लगातार पानी भरने से फैल सकती हैं बीमारियां
एक हफ्ते से जलजमाव के कारण अब क्षेत्र में अनेक तरह की संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक अभी तक लोगों को राहत दिलाने के लिए कोई सरकारी मदद नहीं पहुंची है और न ही पानी का स्तर कम हो रहा है। आसपास के नालियों का दूषित पानी भी क्षेत्र में फैल गया है। इस पर रोक लगाने की दिशा में अभी तक कोई सरकारी प्रयास नजर नहीं आ रहा है।

पीड़ा कहें भी तो किससे कोई आता ही नही
क्षेत्र में हर साल जलजमाव के कारण लोगों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पिछली बार यहां बच्चों के डूबने की घटना भी हुई थी। उम्मीद थी कि जलजमाव की समस्या खत्म होगी। लोगों को सरकारी मदद मुहैया कराई जाएगी, लेकिन अभी तक यहां लोगों को किसी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं मिली है।लेखराज, स्थानीय निवासी

बारिश के समय तो यहां काफी पानी हो गया था। अब कम होने के बाद भी 3 से 4 फीट तक पानी का स्तर है। बच्चों को पानी में नहीं छोड़ा जा सकता । इस कारण गोद में लेकर बच्चे को स्कूल पहुंचाना पड़ता है। विपिन कुमार, स्थानीय निवासी

करीब एक साल पहले ही यहां मकान बनवाया है। क्षेत्र में जलजमाव होने के कारण आसपास जाना भी बेहद मुश्किल हो गया है। यहां घर के चारों ओर पानी ही पानी दिख रहा है। कहीं सूखी जमीन नहीं दिख रही है। -वीना, स्थानीय निवासी

इतने दिनों तक गंदे जल के जमाव के कारण अब संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। पिछले तीन दिनों से जलजमाव के स्तर में कोई कमी नहीं आई है। जलभराव के कारण मच्छर पनप रहे हैं। इससे परेशानी हो रही है।राजेश, स्थानीय निवासी

नकटिया, बहगुल, देवरनियां समेत कई छोटी नदियों का जलस्तर रुक-रुक कर बढ़ रहा है। सभी क्षेत्रों से जानकारी जुटाई जा रही है। किला क्षेत्र में पानी आने की सूचना नगर निगम व प्रशासन को भी दे दी गई है। जल्द ही निरीक्षण कर पानी रोकने की दिशा में तत्काल कदम उठाए जाएंगे।राजेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड

नदी क्षेत्र में अवैध रूप से प्लाटिंग होने से दिक्कतें बढ़ी हैं। सैदपुर हाकिंस और किला छावनी को जोड़ने के लिए बिल्डरों ने अवैध पुल बनाया है। इस पुल का विरोध भी हुआ, लेकिन इसे नहीं तोड़ा गया। इस वजह से किला नदी में पानी बढ़ा तो अतिक्रमण होने की वजह से पानी आबादी वाले क्षेत्रों में घुस रहा है।- दीपक सक्सेना, पार्षद सैदपुर हाकिंस

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