मुरादाबाद : जफर के साथ….. शातिर दिलशाद के पैंतरे से पुलिस चारों खाने चित

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मुरादाबाद, अमृत विचार। 50000 रुपये का इनामी खनन माफिया दिलशाद शातिर निकला। उसके सुरक्षित कोर्ट तक पहुंचने की घटना से जहां पुलिस की सक्रियता की पोल खुली तो दूसरी तरफ उसकी ऊपर तक पहुंच तंत्र पर भारी पड़ी। एक माह के भीतर पुलिस ने खनन माफिया के कई रूप देखे। उनके सिलसिलेवार दुस्साहस के बाद …

मुरादाबाद, अमृत विचार। 50000 रुपये का इनामी खनन माफिया दिलशाद शातिर निकला। उसके सुरक्षित कोर्ट तक पहुंचने की घटना से जहां पुलिस की सक्रियता की पोल खुली तो दूसरी तरफ उसकी ऊपर तक पहुंच तंत्र पर भारी पड़ी।

एक माह के भीतर पुलिस ने खनन माफिया के कई रूप देखे। उनके सिलसिलेवार दुस्साहस के बाद भी पुलिस रौ में नहीं लौट सकी। 13 सितंबर को एसडीएम ठाकुरद्वारा परमानंद सिंह व खान निरीक्षक अशोक कुमार को बंधक बनाकर कानून व्यवस्था को खुली चुनौती दी। खान निरीक्षक की तहरीर पर पुलिस ने खनन माफिया के खिलाफ भले ही मुकदमा दर्ज कर लिया, लेकिन पुलिस की नींद तब टूटी जब शासन ने अधिकारियों को जगाया। उसके बाद माफिया के खिलाफ कार्रवाई तो की गई, लेकिन आधी-अधूरी।

पुलिस की चाल पर भड़के डीआईजी शलभ माथुर ने मातहतों पर दोबारा दबाव बनाया। नए सिरे से पुलिस का दबाव बढ़ता देख खनन माफिया आग बबूला हो गए और उन्होंने पुलिस को सबक सिखाने की ठान ली। जसपुर के जेष्ठ उप ब्लॉक प्रमुख के दरवाजे पर खड़ी पुलिस की माफिया से सीधी मुठभेड़ की। मुठभेड़ में भुल्लर की पत्नी की जान चली गई। मुरादाबाद के पांच पुलिसकर्मियों को बंधक बनाकर तीन के पैरों में खनन माफिया ने गोली मार दी। खनन माफिया के दुस्साहस से पूरा जिला ही नहीं, शासन तक दंग रह गया।

24 घंटे के भीतर ही माफिया जफर की गिरफ्तारी पर घोषित इनाम राशि 50,000 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी गई। शासन ने पूरे प्रकरण को बेहद गंभीरता के साथ लिया। शासन स्तर से पुलिस का मनोबल बढ़ाने की कोशिश की गई। तीन दिन के भीतर फरार जफर से पुलिस की दूसरी बार मुठभेड़ हुई और उसे दबोच लिया।

जफर की गिरफ्तारी के बाद सभी की नजर खनन माफिया की सूची में सबसे अंतिम पायदान पर दर्ज दिलशाद के नाम पर गड़ गई। ठाकुरद्वारा के रतुपुरा गांव के रहने वाले दिलशाद की गिरफ्तारी पर भी 50, 000 रुपये का इनाम था। गैंगस्टर के मुकदमों में वांछित चल रहे दिलशाद को पुलिस के रुख का पता लग चुका था। सफेदपोशों की छांव में खनन माफिया बनने वाला दिलशाद समझ चुका था कि अब उसकी दाल नहीं गलने वाली। लिहाजा वह पुलिस को चकमा देकर कोर्ट पहुंच गया।

सवाल खड़ा कर रही दिलशाद पर दरियादिली

मुरादाबाद की सियासत की नब्ज पर नजर रखने वालों के बीच दिलशाद नया नाम नहीं है। खासकर सत्ताधारी दल के कार्यकर्ताओं में दिलशाद की खासी पहचान है। सत्ताधारी दल के एक बड़े नेता का दिलशाद काे संरक्षण प्राप्त है। नेताजी का खास बनकर ही दिलशाद ने खनन के खेल में अपना सिक्का चलाया। दिलशाद के मार्गदर्शक व कानूनी सलाहकार भी नेताजी ही हैं। यही वजह भी है कि ठाकुरद्वारा पुलिस दिलशाद की गिरफ्तारी से कतराती रही। दिलशाद की नकेल कसने को लेकर उदासीन रही। पुलिस की उदासीनता ही दिलशाद की सफलता का मुख्य कारण बनी और वह सुरक्षित कोर्ट तक पहुंच गया।

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