UPPCS 2021: पीसीएस के रिजल्ट में छाए कानपुर के होनहार
कानपुर। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के 2021 के नतीजों में एक बार फिर मेधावियों ने अभावों को पीछे छोड़ा है। शहर की मेधाओं ने अपनी प्रतिभा को साबित कर दिखाया है। पीसीएस के परीक्षा परिणाम में शहर के बेटे-बेटियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। बुधवार को घोषित अंतिम परिणामों में शहर में पढ़ रहे …
कानपुर। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के 2021 के नतीजों में एक बार फिर मेधावियों ने अभावों को पीछे छोड़ा है। शहर की मेधाओं ने अपनी प्रतिभा को साबित कर दिखाया है। पीसीएस के परीक्षा परिणाम में शहर के बेटे-बेटियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। बुधवार को घोषित अंतिम परिणामों में शहर में पढ़ रहे कई होनहारों ने अपना परचम लहराया। कुछ प्रतिभागी तो पहले ही पीसीएस पद पर तैनात थे, लेकिन अच्छी रैंक के चलते दोबारा परीक्षा दी।
स्वर्णिमा ने लॉकडाउन को बनाया हथियार
शहर के गोविंद नगर में रहने वाली साफ्टवेयर इंजीनियर स्वर्णिमा सिंह का उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग 2021 में डिप्टी एसपी के पद पर चयन हुआ है। स्वर्णिमा ने बताया कि कोरोना काल में जब नौकरी चली गई तो घर लौटकर तय किया की पीसीएस की तैयारी करनी है, और इस ध्येय से लग गई कि इसको हर कीमत पर पास करना है। उन्होंने बताया कि लॉक डाउन को हथियार बनाया और सेल्फ प्रीपेरेशन से तीसरे प्रयास में यह सफलता मिली है। परिवार में मां गीता वर्मा, पिता तारा चंद्र वर्मा और दो भाई और एक बहन है। स्वर्णिमा ने शहर के एचबीटीआई से बीटेक किया है। उन्होंने माता-पिता के साथ नाना-नानी को सफलता का श्रेय दिया है।
बेहतर रैकिंग के चलते दी दोबारा परीक्षा
कल्याणपुर के बिठूर रोड पर स्थित अपार्टमेंट में रहने वाले अजितेश मिश्रा को पीसीएस अच्छी रैंक के साथ जेल अधीक्षक पद मिला है। यह दूसरी दफा है, बेहतर रैकिंग के चलते उन्होंने पीसीएस की दोबारा परीक्षा दी। वर्तमान में वह औरैया में डीएसओ की पोस्ट पर कार्यरत हैं। कहते हैं कि प्रतिभागियों को हिन्दी पर फोकस देना चाहिए। लोग हिंदी की तरफ ध्यान नहीं देते, जबकि इसमें अच्छे नंबर मिलते हैं। पीसीएस परीक्षा के पहले अजितेश ने एसएससी क्लीयर किया था। यहां कैग में नियुक्ति मिली थी। 2014 में यह नौकरी छोड़कर पीसीएस की तैयारी में लग गए थे। उनके पिता अशोक कुमार मिश्रा वन विभाग से रिटायर है और माता मधु मिश्रा विद्यालय में प्रधानाचार्य हैं।
पिता की मौत के बाद पढ़ाई बंद करना चाहते थे सब
2015 में पिता का हार्ट अटैक से निधन के बाद ही लोग पढ़ाई बंद कराना चाहते थे। लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। मन में ठान लिया कि कामयाब होकर ही जवाब दूंगी। इस परिणाम ने जवाब दे दिया है। पीसीएस की परीक्षा में एक्साइज इंस्पेक्टर की पोस्ट पर चयनित होने वाली घुमनी मोहाल की सोनी बाला ने तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की है। सोनी कहती हैं कि पिता सुभाष चंद्र जायसवाल प्राइवेट कर्मी थे, आर्थिक स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं थी और उस समय मैंने स्नातक फाइनल की परीक्षा दी थी। पढ़ाई बंद होने की बात सुनकर मैं थोड़ा सहम गई, लेकिन मां उर्मिला ने सहारा दिया। उसके बाद बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर घर का खर्च और अपनी पढ़ाई पूरी की। 2017 में परास्नातक के बाद स्वयं से पीसीएस की तैयारी की। ननिहाल ने पढ़ाई में काफी सपोर्ट किया। बीएनएसडी से 12वीं और डीएवी कॉलेज से परास्नातक किया।
माता-पिता के आशीर्वाद से बने नायाब तहसीलदार
प्रयागराज के टैगोर मोहल्ले में रहने वाले अनुरूद्ध पांडेय का बुधवार को निकले पीसीएस में चयन हुआ। भाई-बहिनों में सबसे बडे अनुरूद्ध बताते है कि सफलता में सबसे बडा श्रेय माता-पिता का है। इन्होंने हमेशा सपोर्ट किया। बीटेक करने के बाद पहलीबार ही चयन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी पद पर हो गया था। लेकिन ज्वाइन नहीं किया। दोबारा तैयारी शुरू की जिसका परिणाम आज आया है। नायाब तहसीलदार पद पर चयनित होने के बाद आज थोडा ठीक लगा है।
पहले की प्रयास में बनी एक्साइज इंस्पेक्टर
सपने पूरे करने की इच्छा हो तो कोई बाधा आड़े नहीं आती। इस बात को साबित किया है। पीसीएस की परीक्षा पास करने वाली समता सरोज ने। एक पत्नी और सात साल के बेटे की मां समता ने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत लगन से इस सपने को पूरा कर लिया। मूल रूप से लखनऊ की रहने वाली समता की शादी आंबेडकर नगर के करुणेश से हुई थी। कानपुर से तैयारी करने वाली समता कहती हैं कि अच्छे पद पर नौकरी करने का सपना था। पति के सहयोग से स्वयं से तैयारी शुरू की। पहले प्रयास में सफलता मिल गई।
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