Dhanteras 2022: धनतेरस आज और कल, कानपुर में सज गया परंपरा का बाजार

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर, अमृत विचार। धनतेरस (Dhanteras 2022) इस बार दो दिन है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनिवार की शाम छह बजकर तीन मिनट से लगातार ठीक 24 घंटे तक पूजन करने का मुहुर्त रहेगा। इस त्योहार में खूब खरीदारी होती है और पूजन संबंधित सामान ही नहीं, बल्कि गृहस्थि में सामान की बढ़ोतरी के लिए भी हिंदू …

कानपुर, अमृत विचार। धनतेरस (Dhanteras 2022) इस बार दो दिन है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनिवार की शाम छह बजकर तीन मिनट से लगातार ठीक 24 घंटे तक पूजन करने का मुहुर्त रहेगा। इस त्योहार में खूब खरीदारी होती है और पूजन संबंधित सामान ही नहीं, बल्कि गृहस्थि में सामान की बढ़ोतरी के लिए भी हिंदू परिवार इस दिन को बेहद शुभ मानते हैं। ऐसे में बाजार की खूबसूरती में आम दिनों के मुकाबले कई चांद लग जाते हैं। दो दिन के इस त्योहार को लेकर शहर के बाजारों में शुक्रवार से ही रौनक छाने लगी।

मिस्टन रोड, हटिया, गोविंदपुरी, नवाबगंज, कल्याणपुर, मोतीझील, माल रोड सहित शहर के सभी बाजारों में झाड़ू, मेकअप से लेकर बर्तन और सोने चांदी की दुकानें आम दिनों के मुकाबले ज्यादा फैल गईं और रोज के मुकाबले बाजारों में ग्राहकों की चहलकदमी धनतेरस से एक दिन पहले से ही बढ़ने लगी। शनिवार की शाम को बाजार में फुल होने की संभावना है, इसलिए व्यापारे पहले से ही ग्राहकों के लिए दुकानों को सजाने में जुट गए हैं।

600 रुपये से शुरू हैं चांदी के सिक्के
धनतेरस पर चांदी के सिक्के, मूर्ति खरीदने का खूब चलन है। सिक्के की खरीदारी को लोग बेहद जरूरी मानकर करते हैं। सर्राफा बाजार में भी चांदी के सिक्कों की भरमार है। कारोबारी संजय अग्रवाल बताते हैं कि 600 रुपये से सिक्कों की कीमत शुरू है। इसके साथ ही चांदी के दिए, गणेश लक्ष्मी, धनवंतरि, कुबेर, बिस्किट, कटोरी, प्लेट, लोटा, गिलास, चम्मच, पूजा थाल आदि भी उपलब्ध हैं। पूजन संबंधित ज्यादातार सामान चांदी में रखने की कोशिश रहती है। पूजन के दौरान अक्सर परिवार इसकी खरीदारी करते हैं। हालांकि सिक्कों की खरीद ज्यादा होती है।

खूब लुभा रहे पीतल के बर्तन
धनतेरस में पीतल के बर्तन खरीदने की भी पुरानी परंपरा है। इसे काफी शुभ माना जाता है। पीतल का बेला, मूर्ति, लोटा आदि बर्तन खरीदने की काफी होड़ बर्तन बाजारों में देखी जाती हैं। हटिया बाजार के व्यापारी अनुपम गुप्ता बताते हैं कि इस बार बर्तनों के दाम पहले के मुकाबले काफी कम है। डिजाइन में इस बार काफी खूबसूरत बर्तन आए हैं। प्रिटेंड लोटे, थाल, बेला में भी फूल आदि की डिजाइन तैयार की गई है। इस बार पीतल के बर्तनों को इस तरह से डिजाइन किया गया है, जिसे यदि पूजा घर में रखा जाए तो वह काफी आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

बहूमूल्य हैं मामूली कीमत के गोमती चक्र
गोमती नदी का वह पत्थर जिसकी कीमत भले ही मामूली हो, लेकिन धनतेरस पर वह बहूमूल्य माना जाता है। जी हां, गोमती चक्र नाम का यह पत्थर भी धनतेरस के दिन खूब खरीदा जाता है। रत्न विक्रेता कपिल कुमार वर्मा ने बताया कि दो रुपये से 10 रुपये तक गोमती चक्र अलग-अलग आकार में मिल जाते हैं। पूजा में इसकी काफी अहमियत होती है। एक, तीन, पांच में ज्यादा खरीदारी होती है। कई सात, नौ, 11, 21 इसी क्रम में भी खरीदते हैं। नजर उतार कर बेहते जल में प्रवाह करने और मंदिर में रखने जैसी मान्यता है।

100 रुपये तक पहुंच गई झाड़ू
अमूमन बाजार में 50-60 रुपये से शुरू होने वाली झाड़ू की मान्यता धनतेरस इस कदर बढ़ जाती है कि इनकी कीमत भी सैकड़ा छू लेती है। जी हां, धनतेरस पर कई जगहों पर झाड़ू की कीमत सौ रुपये तक थी। हालांकि प्रतिदिन प्रयोग की जाने वाली झाड़ू के मुकाबले इनमें कुछ खास भी किया गया था। फूल की मोटी झाड़ू और हत्थे पर लकड़ी, स्टील आदि का प्रयोग से भी झाड़ू की कीमत ज्यादा हो जाती है। व्यापारी रोहित कुमार ने बताया कि 50 से 100 रुपये तक की झाड़ू उपलब्ध हैं।

इस बार चांदी रंग में मिट्टी के गणेश लक्ष्मी
दीपावली पर इस बार मिट्टी के गणेश, लक्ष्मी, कुबेर, गौ माता के रूप तैयार किए गए हैं। महंगाई के इस दौर में मिट्टी की मूर्तियों की काफी खरीदारी होती है। बाजार में इन मूर्तियों में तरह-तरह रंग और डिजाइन भी निर्मित की गई हैं। मूर्ति विक्रेता रमेश कुमार ने बताया कि मिट्टी पहले से महंगी है। मूर्तियों के भी पुराने रूप लोग कम पसंद करते हैं। ऐसे में आकर्षक मूर्तियों को लाने का प्रयास करते हैं। इस बार चांदी रंग में काफी मूर्तियां हैं। मिट्टी की यह मूर्ति को यदि कोई छूकर न देखे तो ये मूर्ति चांदी की ही लगती हैं। लोग इसके काफी खरीद रहे हैं। दुकान में 50 रुपये से मूर्तियां शुरू हैं, 15 सौ रुपये तक की सुंदर मूर्तियां खूब बिक रही हैं।

मिट्टी के दियों से रोशन करें घर
मिट्टी के दियों से घर को रोशन कर सकते हैं। देसी दियों की खरीदारी हर साल के मुकाबले इस बार ज्यादा हो रही है। इससे दिया बेचने वालों के चेहरे पर खूब खुशी है। दिया विक्रेता राहुल ने बताया कि दिया पिछले बार से महंगा है। लेकिन, लोग खरीद रहे हैं। उम्मीद कम लग रही थी, क्योंकि ये दिये भी लोग ऑनलाइन खरीदने लगे थे। लेकिन इस बार नए ग्राहक दुकान पर आए हैं। पहले ठेला घुमाना पड़ता था, लेकिन इस बार एक से दो स्थान पर ही जाने में ग्राहक मिल जा रहे हैं। राहुल ने बताया कि पहले 90 रुपये सैकड़ा था, अब 130 रुपये के सौ दिये बिक रहे हैं। 25 रुपये का कलश और डिजाइन वाले दिये 10 रुपये के चार हैं।

लेटेस्ट तकनीक के इलेक्ट्रॉनिक सामान की बहार
इलेक्ट्रॉनिक शोरूम में अत्याधुनिकता की बहार है। वाईफाई कनेक्टेड केवल एलईडी ही नहीं बल्कि फ्रिज, वॉशिंग मशीन, स्पीकर, एसी, पंखे आदि मशीनें भी हैं। अत्याधुनिकता के इस दौर में इन नई तकनीकियों के चलते इलेक्ट्रॉनिक बाजार में भी खूब खरीदारी हो रही है। 10 हजार रुपये दाम से शुरू ये मशीने पांच लाख रुपये तक उपलब्ध हैं।

भारतीय झालरों के आगे बुझीं चाइनीज चमक
इस बार बाजार में भारत में निर्मित झालरों की भरमार है। खूबसूरत डिजाइन और अच्छी गुणवत्ता की वजह से चाइनीज झालरों से लोगों का मोह भी टूटने लगा है। घर को रोशन करने के लिए आप 50 रुपये से 500 रुपये तक झालरे खरीद सकते हैं। बाजार में कलश, मटका, बटरफ्लाई, बोतल, गणेश, मंदिर, चांद, तारे, गुड़िया, लालटेन, स्वास्तिक, ओम आदि कई डिजाइन के साथ झालरें उपलब्ध हैं।

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