मुरादाबाद : सीटों के आरक्षण का इंतजार, निकाय चुनाव के लड़ाके तैयार
मुरादाबाद,अमृत विचार। नगर निगम व अन्य नगर निकायों के चुनाव की डुगडुगी भले ही अभी नहीं बजी है लेकिन, लड़ाके तैयार हैं। इसके लिए सीटों के चक्रीय आरक्षण जारी होने का इंतजार है। भाजपा और समाजवादी पार्टी ने निकाय चुनाव के लिए प्रभारियों की घोषणा कर दूसरे दलों से बढ़त ली है। जैसे ही महापौर, …
मुरादाबाद,अमृत विचार। नगर निगम व अन्य नगर निकायों के चुनाव की डुगडुगी भले ही अभी नहीं बजी है लेकिन, लड़ाके तैयार हैं। इसके लिए सीटों के चक्रीय आरक्षण जारी होने का इंतजार है। भाजपा और समाजवादी पार्टी ने निकाय चुनाव के लिए प्रभारियों की घोषणा कर दूसरे दलों से बढ़त ली है। जैसे ही महापौर, पार्षर्दों, नगर पालिका, पंचायतों में चेयरमैन और सभासदों के आरक्षण का ऐलान हाेते ही चुनाव असल रंग में शुरू हो जाएगा।
नगर विकास विभाग वार्ड आरक्षण रिपोर्ट जिलों से मिलने के बाद सीटों के आरक्षण की प्रक्रिया शुरू कराएगा। सीटों का आरक्षण वर्ष 2011 की जनगणना के जातीय आधार पर किया जाना है। लेकिन, अभी यह तय नहीं है कि चक्रानुक्रम के आधार पर अंतिम रूप दिया जाएगा या वार्डों के गठन और उसकी जनसंख्या के और पहले के आरक्षण के अनुरूप नये सिरे से आरक्षित किया जाएगा। इसको लेकर ऊहापोह है। जिलों से सीटों के आरक्षण का फार्मूला तय होने के बाद जो रिपोर्ट भेजी जाएगी उसके बाद नगर विकास विभाग मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद राज्य निर्वाचन आयोग को कार्यक्रम जारी करने के लिए भेजेगा। महापौर और पार्षदों के अलावा नगर पालिका अध्यक्ष, नगर पंचायत के चेयरमैन, सभासदों के आरक्षण का सबको इंतजार है।
निगम में भाजपा, सपा और कांग्रेस के कई पुराने पार्षद जो तो खुद कई बार से चुनाव जीत रहे हैं या फिर बीच-बीच में महिला सीट होने पर परिवार की महिलाओं के बूते उस पर कब्जा जमाए हैं। वह एक बार फिर अपना सिक्का जमाने में मनमाफिक आरक्षण होने की आस लगाए हैं। नगर आयुक्त संजय चौहान का कहना है कि शासन के द्वारा सीटों के आरक्षण की घोषणा के आधार पर नगरीय निकाय चुनाव होंगे। निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार स्थानीय स्तर पर चुनाव के सभी प्रबंध जिला प्रशासन के साथ मिलकर किया जाएगा।
महापौर सीट के आरक्षण पर सबकी नजर
नगर निगम में पार्षदों से अधिक महापौर सीट के आरक्षण पर सबकी नजर है। छह बार से यह सीट सामान्य और बीच में महिला के लिए रही। जिससे वर्तमान महापौर विनोद अग्रवाल और उनकी पत्नी ने ही इस पद पर अपनी धाक जमाए रखी। एक बार फिर इसी परिवार में सीट रहने की अटकलें तेज हैं। लेकिन, पार्टी में ही उनके राजनीतिक विरोधी किसी भी कीमत पर उनको इस बार रेस से बाहर देखना चाहते हैं। ऐसे में आरक्षण की घोषणा से किसी का पत्ता कटेगा तो किसी की लाटरी लगनी तय है। कई नये चेहरे भी इस बार किस्मत आजमाने को तैयार हैं।
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