बांदा : संदिग्ध परिस्थितियों में अधेड़ ने दम तोड़ा
अमृत विचार, बांदा। संदिग्ध परिस्थितियों में अधेड़ का शव बस स्टाप के समीप नाली के ऊपर पड़ा पाया गया। शव देखते ही परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस का कहना है कि अधिक शराब पीने से उसकी मौत हुई है। जबकि मृतक के बड़े भाई का आरोप है कि शराब पिलाने के बाद उसकी हत्या …
अमृत विचार, बांदा। संदिग्ध परिस्थितियों में अधेड़ का शव बस स्टाप के समीप नाली के ऊपर पड़ा पाया गया। शव देखते ही परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस का कहना है कि अधिक शराब पीने से उसकी मौत हुई है। जबकि मृतक के बड़े भाई का आरोप है कि शराब पिलाने के बाद उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
देहात कोतवाली क्षेत्र के गुरेह गांव निवासी राममणि उर्फ नन्ना प्रजापति (50) पुत्र रामसजीवन मंगलवार की शाम वह घर से घूमने के लिए निकल गया था। देर रात जब वह घर नहीं लौटा तो परिजनों ने उसकी खोजबीन की। देर रात उसका शव गांव के बाहर बस स्टाप के समीप नाली के ऊपर पड़ा पाया गया। शव देखते ही परिजनों में चीख पुकार मच गई। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने परिजनों से पूछतांछ करने के बाद शव को कबजे में ले लिया।
मृतक के पुत्र छत्रपाल का कहना है कि वह अपनी मौसी के घर सेढ़ू तलैया आया था। पिता उसका घर में था। बुधवार को अहमदाबाद जाने की तैयारी थी। वहीं मृतक के बड़े भाई चुन्ना ने बताया कि तीन माह पहले उसका पड़ोसी से विवाद हो गया था। पड़ोसी ने मारपीट कर उसका हाथ भी तोड़ दिया था और जान से मारने की धमकी दी थी। चुन्ना का आरोप है कि अधिक शराब पिला दी गई और पानी में डुबोकर मार डाला गया।
वरिष्ठ पत्रकार के निधन पर पत्रकारों और कांग्रेसियों ने जताया शोक
स्थानीय पत्रकारिता से लेकर देश की राजधानी तक अपनी तेज तर्रार पत्रकारिता और धारदार लेखनी की धाक जमाने वाले वरिष्ठ पत्रकार अरुण खरे का बुधवार को आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन से पत्रकारिता जगत समेत सियासी हलकों और समाजसेवियों में शोक की लहर दौड़ गई। बुधवार की दोपहर श्री खरे के पार्थिव शरीर को पंच तत्व में विलीन कर दिया गया। कांर्ग्रेस अध्यक्ष प्रद्युम्न कुमार लालू दुबे ने स्व पत्रकार अरूण खरे को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने लगभग तीन दशक पूर्व शहर के प्रकाशित एक स्थानीय समाचार पत्र से अपनी पत्रकारिता शुरू की।
उन्होंने कहा कि अपनी निर्भीक पत्रकारिता, धारदार लेखनी की वजह से वह थोडे ही समय में पत्रकारिता के क्षेत्र में चर्चित होने के साथ ही आमजन के बीच भी अपनी बेहतर पहचान बना ली थी। वह करीब एक दशक तक स्थानीय समाचार पत्रों मे छाए रहे। उसके बाद अपने सहयोगी पत्रकारों के साथ वह दिल्ली चले गए। वहां पर भी उन्होंने अपनी एक खास जगह बनाई और जल्दी ही लोकप्रिय हो गए।
स्व खरे वहां के एक अखबार में काम करते हुए लोकसभा के स्थाई संवाददाता के रूप में काफी समय तक योगदान देते रहे। इसके बाद उन्होंने जबलपुर मध्यप्रदेश के एक समाचार पत्र समेत कई अन्य समाचार पत्रों में उन्होंने अपनी सेवाएं दी। श्री दुबे ने कहा कि स्व अरूण खरे कांग्रेस से आजीवन जुडे रहे। उनके दिए गए योगदान के प्रति हमसब गर्व महसूस करते हैं।
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