रामपुर में बनेगा दुनिया का पहला पितृ स्मृति वन, अस्थियों की राख के साथ रोपे जाएंगे पौधे
अखिलेश शर्मा, अमृत विचार। मानव अस्थियों की राख को बीज के साथ रोपा जाए तो कितना डीएनए (डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड) पेड़ में ट्रांसफर होगा, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) में यह रिसर्च चल रहा है। इससे पहले ही लखनऊ के एक नामचीन डाक्टर ने मिलक तहसील के क्रमचा गांव में स्थित वेद आश्रम में दुनिया …
अखिलेश शर्मा, अमृत विचार। मानव अस्थियों की राख को बीज के साथ रोपा जाए तो कितना डीएनए (डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड) पेड़ में ट्रांसफर होगा, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) में यह रिसर्च चल रहा है। इससे पहले ही लखनऊ के एक नामचीन डाक्टर ने मिलक तहसील के क्रमचा गांव में स्थित वेद आश्रम में दुनिया के पहले पितृ स्मृति वन स्थापित करने की घोषणा कर दी है, कोई भी व्यक्ति अपने पितरों की स्मृतियां संजोने के लिए उनकी अस्थियों की राख के कुछ हिस्से के साथ पौधा लगा सकते हैं। देश के जाने माने पर्यावरण प्रेमी हरितऋषि और ग्रीन मैन का पुरस्कार प्राप्त विजय पाल बघेल इस स्मृति वन को तैयार कराने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
- लखनऊ के नामचीन डाक्टर ने मिलक स्थित वेद आश्रम में स्मृति वन को दी जमीन
- हरितऋषि विजयपाल बघेल के दिशा-निर्देशन में शुरू हुआ पितृ स्मृति वन का काम
रामपुर पहुंचे ग्रीन मैन विजय पाल बघेल ने बताया वेद आश्रम क्रमचा में तैयार पितृ स्मृति वन दुनिया का पहला ऐसा वन होगा, जहां अस्थियों की राख के साथ लगाए गए पौधे दरख्त का रूप लेंगे, इन दरख्त में लोग अपने माता-पिता के डीएनए के रूप में उनकी स्मृतियां संजो सकेंगे। इस पितृ स्मृति वन में कल्पवृक्ष का पौधा भी लगाकर शुरूआत कर दी गई है। लखनऊ के निर्वाण अस्पताल के अध्यक्ष नामचीन डाक्टर हरीश अग्रवाल (मनो रोग विशेषज्ञ) ने घोषणा की है कि कोई भी व्यक्ति इस स्मृति वाटिका में अपने माता-पिता, दादा, दादी किसी की भी अस्थियों की राख का कुछ हिस्सा लेकर आएं और जो चाहे वह पौधा या बीज के साथ रोपाई करके अपने पूर्वजों की स्मृतियों को संजो सकते हैं। इस स्मृति वन में कितने पेड़ लगाए जाएंगे इसकी कोई सीमा तय नहीं की गई है।
रिसर्च पेपर तैयार कर रहा है पूसा
राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के हाथों सम्मानित और अमेरिका की ओर से ग्रीन मैन का खिताब प्राप्त विजय पाल बघेल जिनके ऊपर भारत सरकार पांच रुपये का डाक टिकट भी जारी कर चुकी है। बघेल ने बताया कि पूसा में इस बात पर अध्ययन चल रहा है कि अस्थियों की राख को बीज या पौधे के साथ रोपा जाएगा तो कितने प्रतिशत डीएनए लगाए जाने वाले पेड़ में ट्रांसफर होगा। पूसा के वैज्ञानिकों से अनुरोध किया गया है कि इस रिर्सच को जल्द पूरा करें, ताकि लोगों में इस तरह से पर्यावरण के प्रति प्रेम की भावना पैदा हो सके।
हरिद्वार में भी प्रस्तावित है पितृ स्मृति वन
ग्रीन मैन विजय पाल बघेल का कहना है कि हरिद्वार के वन क्षेत्र में पितृ स्मृति वन बनाए जाने की सहमति मिल चुकी है, लेकिन पूसा से रिर्सच की रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। यह तय होते ही कि अस्थियों की राख के साथ रोपे गए पौधे में कितने प्रतिशत डीएनए ट्रांसफर होगा। यहां भी स्मृति वन की कल्पना साकार हो जाएगी। हरिद्वार एक ऐसा स्थान है जहां दुनिया भर से सनातन धर्म के लोग अस्थि विसर्जन के लिए आते हैं।
क्या है डीएनए
हमारा शरीर छोटी छोटी कोशिकाओं से मिलकर बना है और सभी कोशिका में डीएनए (डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड) पाया जाता है। डीएनए हमारे मानव शरीर के गुणों (जैनेटिक कोड) को या बायोलॉजिकल इनफॉर्मेशन को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में ट्रांसफर करता है।
पितृ स्मृति वन की कल्पना को साकार करने के लिए वेद आश्रम की वाटिका का चयन कर दिया है। कोई भी व्यक्ति अस्थियों की थोड़ी से राख लाकर यहां अपने पितरों की स्मृतियों को संजो सकता है, ताकि उसे वृक्ष के रूप में सदैव अपने पितर याद रहेंगे, इससे पर्यावरण की रक्षा होगी, प्रत्येक व्यक्ति को वृक्ष लगाने का संकल्प लेना चाहिए। -डा. हरीश अग्रवाल, अध्यक्ष वेद आश्रम
पेड़ जीवित प्राणी के समान है, मनुष्य जीवन के लिए पंच तत्वों की जरूरत होती है, तो पेड़ के लिए 16 तत्वों की। पितृ स्मृति वन की कल्पना को साकार रूप देने के लिए लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूक करना ही मुख्य लक्ष्य है। हमारी सरकार से मांग है कि वृक्ष को जीवित प्राणी का वैधानिक दर्जा दें, राष्ट्रीय वृक्ष नीति बने, जीपीएस के माध्यम से यूआईडी नंबर समेत पेड़ की गणना और राष्ट्रीय ध्वज की तरह राष्ट्रीय वृक्ष (बरगद) को सम्मान मिले। – विजय पाल बघेल, हरितऋषि, ग्रीनमैन जैसे पुरस्कार प्राप्त पर्यावरण प्रेमी।
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