लखनऊ: बिजली अभियंताओं पर हर समय रहता है हमले का डर
अमित सिंह, लखनऊ। मंगलवार को चिनहट बिजली उपकेंद्र पर हुए मारपीट, तोड़फोड़ और पथराव की घटना एक उदाहरण मात्र है। ऐसी घटनाएं प्रदेश के उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन के हर एक बिजली घर या उपखंड कार्यालय पर देखी जा सकती हैं। जिस वजह से बिजली अभियंता और फील्ड कर्मियों को हमेशा से हमले का डर …
अमित सिंह, लखनऊ। मंगलवार को चिनहट बिजली उपकेंद्र पर हुए मारपीट, तोड़फोड़ और पथराव की घटना एक उदाहरण मात्र है। ऐसी घटनाएं प्रदेश के उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन के हर एक बिजली घर या उपखंड कार्यालय पर देखी जा सकती हैं। जिस वजह से बिजली अभियंता और फील्ड कर्मियों को हमेशा से हमले का डर सताता रहता है।
उन्हें इस बात का आभास रहता है कि उनके पर किसी भी दिन कोई हमला कर सकता है। इस कारण से वे हमेशा से जान को जोखिम में डालकर काम करते हैं। उनके अंदर डर का माहौल बना रहता है। जिस तरह से अब बिजली अभियंताओं पर हमले हो रहे हैं, वो दिन दूर नहीं की बिजली अभियंता चेकिंग अभियान से मुंह न मोड़ लें। यदि ऐसा हो जाएगा तो विभाग को जबर्दस्त राजस्व का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बिजली अभियंताओं ने बताया कि हमे हर दिन किसी न किसी अनहोनी का डर सताता रहता है। वे बताते हैं फील्ड या कार्यालय में काम करने के दौरान कई बार हम लोगों पर हमले हो चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी विभाग की ओर से इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। पुलिस और चिकित्सा के बाद सबसे ज्यादा लोगों के हमले के शिकार होने वाला विभाग बिजली है। इसके बाद भी अभियंताओं और कर्मियों की सुरक्षा को लेकर प्रबंधन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे हैं।
चेकिंग के दौरान सबसे ज्यादा हमले की संभावना
विभागीय अभियंताओं ने बताया कि बिजली चेकिंग अभियान के दौरान सबसे ज्यादा हमले की संभावना बनी रहती है। वे अभियान में तो जाते तो हैं लेकिन उन्हे हर समय हमले का डर सताता रहता है। वे बताते हैं कि यदि अभियान के दौरान भारी फोर्स है तो हमले की संभावना कम रहती है। लेकिन यदि एक-दो पुलिसकर्मी या बिना फोर्स के अभियान को चलाया जा रहा है तो ये 100 फीसद चेकिंग टीम पर उपद्रवियों द्वारा हमला कर दिया जाता है। जिसमें तो कई बार अभियंता और बिजली कर्मी बुरी तरह से घायल भी हो गए हैं। जिसके बाद विभाग ने भी कोई सहयोग नहीं किया है।
उपभोक्ता मान लेते हैं निजी दुश्मनी
मंगलवार को चिनहट में हुए हमले सहित कई और बार उपद्रवियों द्वारा बिजली टीम पर निजी दुश्मनी मानकर हमला किया गया है। अभियंता बताते हैं कि चेकिंग अभियान के दौरान बहुत से बकायेदार उपभोक्ताओं के कनेक्शनों को काट दिया जाता है। इस दौरान कुछ शरीफ उपभोक्ता तो अपनी गलती मानते हुए बकाया भुगतान करके बिजली जुड़वा लेते हैं, वहीं बहुत से उपभोक्ता (एक तरह के उपद्रवी या दबंग) बकाये पर कनेक्शन काटे जाने को निजी दुश्मनी मान बैठते हैं।
कभी-कभी तो वे अभियंताओं और कर्मचारियों पर जानलेवा हमला कर बड़ी से बड़ी घटनाओं को अंजाम दे देते हैं। मंगलवार को चिनहट में हुई घटना भी इसी में से एक है। वहीं मथुरा में जूनियर इंजीनियर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अवर अभियंता की हत्या में भी दबंग उपभोक्ताओं नाम आया था। लखनऊ के साथ ही पूरे प्रदेश में सप्ताह में दो-तीन जानलेवा घटनाएं अभियंताओं और कर्मचारियों के साथ हो जाती हैं।
उपखंड अधिकारी और अवर अभियंता होता है निशाने पर
चेकिंग अभियान के दौरान दबंग और उपद्रवी उपभोक्ताओं के निशाने पर हमेशा से उपखंड अधिकारी और अवर अभियंता होते हैं। उपभोक्ताओं के दिल और दिमाग में रहता है कि उनके खिलाफ जो भी कार्रवाई होती है इसमे इन दोनों ही अभियंताओं का रोल होता है। जिसकी वजह से ये दोनों अधिकारी उपद्रवियों के टारगेट पर होते हैं। हमले के दौरान हमेशा से दबंगों द्वारा ये बोलते हुए देखा जाता है कि मारो जेई और एसडीओ को। आपको बता दें कि एक सर्वे रिपोर्ट में आया था कि बिजली चेकिंग के दौरान चोरी में पकड़े जाने वाला हर दूसरा व्यक्ति बिजली चोरी को अपराध नहीं मानता है। जिसकी वजह से वह हमला करने से नहीं चूकता है।
लखनऊ में इन जगहों पर होते हैं सबसे ज्यादा हमले
राजधानी लखनऊ के सबसे ज्यादा हमले पुराने शहर चौक, चौपटिया, ठाकुरगंज, नादान महल रोड, विक्टोरिया, अमीनाबाद, नजीराबाद, सआदतगंज, ऐशबाग, हुसैनगंज, उदयगंज, नाका, रेजीडेंसी, राजेन्द्र नगर, आलमबाग, ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही कई और क्षेत्रों में अक्सर बिजली टीम पर हमले होते रहते हैं। इन सभी जगहों पर जो चेकिंग के बाद भी कई बार तो बिजली घरों पर हमला कर दिया गया है।
