बरेली: फर्जी रजिस्ट्रेशन प्रकरण में एसीएमओ को नोटिस जारी
बरेली, अमृत विचार। झोलाछापों को दिए गए फर्जी नोटिसों की अब सीएमओ कार्यालय में बाढ़ सी आ गई है। पीलीभीत बाईपास रोड स्थित एक हेम्योपैथी चिकित्सालय का फर्जी रजिस्ट्रेशन करने गंभीर हो गया है। परतें खुलने से अधिकारी भी डर गए हैं। जांच के दौरान एक के बाद एक कई मामले सामने आ रहे हैं। …
बरेली, अमृत विचार। झोलाछापों को दिए गए फर्जी नोटिसों की अब सीएमओ कार्यालय में बाढ़ सी आ गई है। पीलीभीत बाईपास रोड स्थित एक हेम्योपैथी चिकित्सालय का फर्जी रजिस्ट्रेशन करने गंभीर हो गया है। परतें खुलने से अधिकारी भी डर गए हैं। जांच के दौरान एक के बाद एक कई मामले सामने आ रहे हैं। फर्जी नोटिस देकर वसूली करने वाला मुरादाबाद का ड्राइवर और उसके सरगना की छानबीन में स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से जुट गया है।
वहीं, सीएमओ डा. वीके शुक्ल ने इस मामले में एसीएमओ को नोटिस जारी कर पूछा है कि फर्जी नोटिस पर कहीं आपके तो हस्ताक्षर नहीं है? वहीं, एसीएमओ के शहर से बाहर होने पर उनके जवाब आने के बाद ही कार्रवाई की जाने की बात महकमे के अफसर कह रहे हैं।
पिछले दिनों एक भाजपा नेता ने सीएमओ डा. वीके शुक्ल से शिकायत की थी कि कुछ लोग विभागीय कर्मचारी बनकर वसूली कर रहे हैं। उन्होंने झोलाछाप को दिए कई फर्जी नोटिस भी सीएमओ को दिया था और मामले की जांच कराने के लिए कहा था। साथ ही फर्जी रजिस्ट्रेशन की भी शिकायत की। जांच शुरू होने से पहले सोशल मीडिया पर फर्जी मुहर गिरोह की वीडियो वायरल हो गया।
पता चला कि एक डाक्टर के ड्राइवर ने फर्जी फार्मासिस्ट का पहचान पत्र बनवा लिया है। जिस पर सीएमओ बरेली की जाली मुहर लगी है। गिरोह के सरगना के इशारे पर वह एक होमगार्ड के साथ वसूली करने जाता है। खुद को फार्मासिस्ट बताकर फर्जी नोटिस देता है और फिर झोलाछाप को सीएमओ कार्यालय परिसर में बुलाकर वसूली करता था। अब सीएमओ ने मामले की जांच कराकर कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने एक एसीएमओ से पूछा है कि फर्जी नोटिस पर उनके हस्ताक्षर हैं या नहीं। एसीएमओ अभी शहर से बाहर हैं। उनके आने के बाद इस मामले में आगे कार्रवाई होगी।
फर्जी नोटिस में सीएमओ की मुहर के नीचे हस्ताक्षर
जिस फर्जी नोटिस की जांच हो रही है, उस पर 7 जुलाई की तारीख है। नोटिस पर मुख्य चिकित्साधिकारी के नाम वाली मुहर लगी है और हस्ताक्षर भी है। हस्ताक्षर सीएमओ का नहीं है जो सबसे बड़ा सवाल है। आखिर मुख्य चिकित्साधिकारी की उपस्थिति में और उनकी जानकारी के बिना उनकी मुहर के नीचे हस्ताक्षर कैसे हो सकता है। सबसे चौंकाने वाली बात है कि 7 जुलाई को डा. आलोक चंद्रा आफिस मे ही थे तो उनकी जगह कौन चेकिंग करने चला गया। पूरा संदेह फर्जी मुहर वसूली गैग के ड्राइवर पर जा रहा है।
नोटिस पर हस्ताक्षर के बारे में एसीएमओ से पूछा गया है। अगर उनके हस्ताक्षर हैं तो इस पर भी जवाब मांगा जाएगा कि मुख्य चिकित्साधिकारी की मुहर पर उन्होंने हस्ताक्षर क्यों किए। उनके हस्ताक्षर नहीं हुए तो जांच कराई जाएगी। फर्जी रजिस्ट्रेशन की जांच एसीएमओ डा. आरएन गिरी को दी गई है। फर्जी पहचान पत्र की जांच एसीएमओ डा. आलोक चंद्रा कर रहे हैं। – डा. विनीत शुक्ल, सीएमओ
