बांदा: नीलकंठेश्वर महादेव में चंद्रग्रहण के काले साये का नहीं दिखा प्रभाव
बांदा। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर अजेय दुर्ग कालिंजर में मंगलवार से आरंभ हुए तीन दिवसीय मेले में प्रथम दिन चंद्रग्रहण के काले साये से यहां उमड़ने वाले श्रद्धालुओं के सैलाब पर कोई असर नहीं नजर आया। हालांकि ग्रहण के समय जरूर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या घट गई, लेकिन इससे पहले हजारों लोग दुर्ग …
बांदा। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर अजेय दुर्ग कालिंजर में मंगलवार से आरंभ हुए तीन दिवसीय मेले में प्रथम दिन चंद्रग्रहण के काले साये से यहां उमड़ने वाले श्रद्धालुओं के सैलाब पर कोई असर नहीं नजर आया। हालांकि ग्रहण के समय जरूर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या घट गई, लेकिन इससे पहले हजारों लोग दुर्ग स्थित बुड्ढा-बुड्ढी तालाब में स्नान करने के बाद यहां विराजे नीलकंठेश्वर महादेव के दर्शन प्राप्त कर चुके थे।
मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्घाटन विधायक ओममणि वर्मा ने फीता काटकर किया। लोगों ने यहां लगने वाले मेले का भी खूब लुत्फ उठाया। एतिहासिक कालिंजर दुर्ग में लगने वाले तीन दिवसीय कार्तिक पूर्णिमा मेले में प्रथम दिन कयास लगाये जा रहे थे कि चंद्रग्रहण के कारण नीलकंठेश्वर महादेव के दर्शनों को भीड़ नहीं जुटेगी, क्योंकि चंद्र ग्रहण में सूतक ग्रहण से 9 घंटा पूर्व लग जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार सूतक सुबह साढ़े आठ बजे से प्रभावी बताया जा रहा था, लेकिन महादेव के दरबार में चंद्रग्रहण के काले साये की छाया नहीं पड़ी।
चंद्रग्रहण आरंभ होने से लेकर समाप्त होने तक मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या मंर कुछ कमी देखी गई, लेकिन इसके पहले सुबह से शाम तक हजारों की तादाद में श्रद्धालु सूतक काल के दोष को नकारते हुए बुड्ढा-बुड्ढी तालाब में स्नान करने के बाद नीलंकठेश्वर महादेव में जलाभिषेक करके दर्शन लाभ प्राप्त कर चुके थे। उधर, मेला परिसर राठौर महल में लगी सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन विधायक ओममणि वर्मा ने फीता काटकर। कालिंजर दुर्ग से लेकर नीचे तक लगी सैकड़ों दुकानों में भी खरीददारों की जबरदस्त भीड़ रही।
मेले के प्रमुख आकर्षण का केंद्र यहां लगने वाले झूले हैं। बच्चों के साथ महिलाओं और युवाओं ने झूले का खुब आनंद लिया। मेला परिसर में खोया-पाया केंद्र बनाया गया है, ताकि मेले में अपनों से बिछड़ लोगों को मिलाने में आसानी हो सके। सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन की ओर से मेला परिसर में तो भारी पुलिस फोर्स का इंतजाम देखा गया, यहां एसआई एसके गौड़ मोर्चा संभाले रहे, लेकिन मंदिर प्रांगण में सुरक्षा व्यवस्था की व्यवस्था अत्यंत लचर दिखी। यहां पुलिस की कोई व्यवस्था नहीं नजर आई।
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