'आज का युग, युद्ध का नहीं होना चाहिए', G20 घोषणापत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश की गूंज
बाली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत में जो संदेश दिया था उसकी प्रतिध्वनि जी20 शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र में बुधवार को सुनाई दी। घोषणापत्र में नेताओं ने यूक्रेन युद्ध को तत्काल खत्म करने का आह्वान करते हुए कहा कि “आज का युग, युद्ध का युग नहीं होना चाहिए।” दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के अंत में एक विज्ञप्ति जारी की गई जिसमें यूक्रेन पर रूसी आक्रमण और दुनिया के लिए इसके प्रभावों पर व्यापक रूप से विचार-विमर्श किया गया।
India will assume the G-20 Presidency for the coming year. Our agenda will be inclusive, ambitious, decisive and action-oriented. We will work to realise all aspects of our vision of ‘One Earth, One Family, One Future.’ pic.twitter.com/fRFFcDqpzO
— Narendra Modi (@narendramodi) November 16, 2022
इसमें कहा गया, “संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान, संकटों को दूर करने के प्रयास, साथ ही कूटनीति और संवाद महत्वपूर्ण हैं। आज का युग युद्ध का नहीं होना चाहिए।” शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के इतर 16 सितंबर को उज्बेकिस्तान में पुतिन के साथ अपनी द्विपक्षीय बैठक में मोदी ने कहा था “आज का युग, युद्ध का नहीं है” और उन्होंने संघर्ष को समाप्त करने के लिए रूसी नेता से आग्रह किया था। इंडोनेशियाई राष्ट्रपति जोको विडोडो का कहना है कि जी20 घोषणापत्र में रूस-यूक्रेन पैराग्राफ पर गहन चर्चा हुई थी।
Eccellente incontro con il Presidente del Consiglio @GiorgiaMeloni. Abbiamo scambiato opinioni su come India e Italia possano lavorare a stretto contatto in settori come l'energia, la difesa, la cultura e gli incentivi al cambiamento climatico. pic.twitter.com/SUbxYJFsb7
— Narendra Modi (@narendramodi) November 16, 2022
जी20 बाली घोषणापत्र में रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर मतभेदों की बात स्वीकार करते हुए कहा गया कि अधिकांश सदस्यों ने इसकी कड़ी निंदा की है। घोषणापत्र के मुताबिक अधिकतर सदस्यों का कहना है कि यूक्रेन युद्ध भारी मानवीय पीड़ा का कारण बना जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था में मौजूदा कमजोरियों को बढ़ाया। अधिकांश सदस्यों ने कहा कि यूक्रेन युद्ध से विकास बाधित हुआ, मुद्रास्फीति में वृद्धि हुई और ऊर्जा व खाद्य असुरक्षा बढ़ी। बाली घोषणापत्र में यह भी कहा गया कि शांति और स्थिरता की रक्षा करने वाले अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षीय व्यवस्था को कायम रखना जरूरी है। इसमें सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा सहित अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने का आह्वान भी किया गया।
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