बांदा कृषि विवि की नियुक्तियों में हुई धांधली, वेतन रिकवरी के दिये आदेश
बांदा, अमृत विचार। पांच वर्ष पूर्व 40 पदों पर तत्कालीन कुलपति और निदेशक की मिलीभगत से नियुक्तियों में हुई धांधली को लेकर प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। विशेष सचिव ने जांच आख्या के आधार पर कठोर कार्रवाई करते हुए दोषी अधिकारियों और अवैध रूप से नियुक्त सभी कार्मिकों से अब तक मिले वेतन की रिकवरी कराये जाने का आदेश दिया है।
बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में वर्ष 2017 में 40 पदों पर नियुक्तियों को लेकर हुई धांधली को लेकर एक बार फिर पूरे सूबे में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। तत्कालीन कुलपति एसएल गोस्वामी और निदेशक प्रसार एवं अनुश्रवण डॉ.एनके बाजपेयी ने साठगांठ करके यह नियुक्तियां की थीं। हालांकि उसके फौरन बाद नियुक्ति से वंचित रह गये अभ्यर्थियों ने इसके खिलाफ आवाज बुलंद की थी, लेकिन उस वक्त उनकी आवाज को दबाकर नियुक्तियों को हरी झंडी दे दी गई थी।
एसोसिएट प्रोफेसर (कृषि प्रसार) भानु प्रकाश मिश्र, 5 स्टेनोग्राफर और 9 ड्राइवर समेत सभी 40 नियुक्त कर्मचारियों को तब से बराबर वेतन भी दिया जा रहा है। नियुक्तियों में धांधली का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता कौशल किशोर तत्कालीन आयुक्त से इस संबंध शिकायत करते हुए साक्ष्य पेश किये थे।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि स्टेनोग्राफर पद पर विज्ञापन के अनुसार अर्हता पूरी नहीं की थी, इसके बावजूद उनकी नियुक्ति हो गई। इसके साथ ही वाहन चालकों की भी नियुक्ति बिना वैध लाइसेंस की कर ली गई। इतना ही नहीं नियुक्ति पाने वालों में से अधिकांश लोग डॉ.एनके बाजपेयी के रिश्तेदार हैं। इस संबंध में शासन ने कड़ा रुख एख्त्यार करते हुए तत्कालीन आयुक्त से ही जांच करवाई थी।
तकरीबन एक वर्ष पूर्व शासन को भेजी गई जांच आख्या में धांधली का स्पष्ट जिक्र किया गया था। विशेष सचिव देवेंद्र कुमार सिंह कुशवाहा ने जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन कुलपति को दोषी मानते हुए कठोर कार्रवाई और धांधली से नियुक्त सभी कर्मचारियों से अब तक के वेतन की वसूली के आदेश दिये हैं। सहायक जनसंपर्क अधिकारी डॉक्टर बालेन्द्र राजपूत ने बताया कि आदेश की कॉपी मिलते ही कार्यवाही की जाएगी।
