रामपुर : जौहर ट्रस्ट के 72 सदस्यों पर 27 मुकदमे, नसीर खां की विधायकी पर भी मंडराया संकट
चमरौआ विधायक नसीर खां भी हैं जौहर ट्रस्ट के सदस्य, पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट पर हाईकोर्ट में दी गई चुनौती, नहीं मिली राहत
रामपुर, अमृत विचार। जिले में ऐसा राजनीतिक संकट गहराया हुआ है जो रुकने का नाम नहीं ले रहा, पहले अब्दुल्ला आजम की विधायकी गई अब दूसरी बार भी विधायकी पर संकट है, इसके बाद तीन साल की सजा होने पर आजम खां की विधायकी भी चली गई। अब चमरौआ से सपा विधायक नसीर खां की विधायकी भी संकट में मानी जा रही है। नसीर खां मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के सदस्य हैं, ट्रस्ट के 72 सदस्यों पर 27 मुकदमे दर्ज हैं, पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, ट्रस्ट के सभी सदस्यों ने चार्जशीट के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने कोई राहत नहीं दी। अब सभी सदस्यों को निचली अदालत में ट्रायल से गुजरना होगा। ट्रस्ट के सदस्यों पर जो मुकदमे दर्ज हैं उनमें अधिकांश में कम से कम तीन साल की सजा का प्रावधान है, अगर सजा हुई तो चमरौआ से नसीर खां की विधायकी भी संकट में आ सकती है।
- दर्ज हुए मुकदमों में अधिकांश में तीन साल से अधिक की सजा का है प्रावधान
- जौहर ट्रस्ट के सभी ट्रस्टियों को अब निचली अदालत में ट्रायल से गुजरना होगा
बता दें कि रामपुर के तमाम किसानों व राजस्व निरीक्षक ने सपा नेता व पूर्व मंत्री आजम खान व उनके करीबियों के खिलाफ रसूख का इस्तेमाल करते हुए जमीन को जबरन कब्जा करने व दबाव बनाकर उसे अपनी जौहर यूनिवर्सिटी के नाम ट्रांसफर कराने के मामलों में एफआईआर दर्ज कराई थी। साल 2019 और 2020 में आजम खां समेत उनके ट्रस्ट से जुड़े हुए 72 अन्य लोगों के खिलाफ रामपुर के अजीम नगर थाने में आपराधिक मुकदमे दर्ज हुए थे। इन सभी मामलों में जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी थी। सबसे पहले आजम खान के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई थी और उसके बाद अन्य आरोपियों के खिलाफ। ट्रस्ट के सदस्यों में चमरौआ विधायक नसीर खां भी शामिल हैं।
सभी सदस्यों को हाईकोर्ट से लग चुका बड़ा झटका
समाजवादी पार्टी के नेता और यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान के करीबियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लग चुका है। हाईकोर्ट ने आजम खान के ट्रस्ट से जुड़े 72 सदस्यों की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। जौहर ट्रस्ट के इन 72 ट्रस्टियों के खिलाफ रामपुर में 27 मुकदमे दर्ज थे। ट्रस्टियों ने पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी और अपने ऊपर लगे आरोपों को फर्जी व बेबुनियाद करार दिया था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से चार्जशीट रद्द किए जाने की गुहार लगाई थी। जस्टिस समित गोपाल की सिंगल बेंच ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था, अदालत ने जांच एजेंसी द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट में कोई कमी नहीं मानी थी, हाईकोर्ट द्वारा सभी याचिकाएं खारिज किए जाने से यह साफ हो गया है कि सरकारी अमले ने इस मामले में जो भी कार्यवाही की उस पर अदालत ने भी अपनी मुहर लगा दी है। आजम खान के करीबी विधायक नसीर खां, पूर्व डिप्टी एसपी आले हसन व जकी उर रहमान समेत अन्य लोग इस मामले में आरोपी बनाए गए थे।
निचली अदालत में ट्रायल से गुजरना होगा
चार्जशीट के खिलाफ आजम खान समेत बाकी सभी अन्य 72 आरोपी भी इलाहाबाद हाईकोर्ट गए थे। आज़म की याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुके थीं। 72 अन्य आरोपियों की याचिका पर हाईकोर्ट ने कई हफ्तों तक एक साथ सुनवाई की थी। जस्टिस समित गोपाल की सिंगल बेंच ने सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई पूरी होने के बाद इसी साल 5 सितंबर को अपना फैसला सुनाया और आजम खान के करीबियों व उनके ट्रस्ट के सदस्यों को कोई राहत नहीं दी थी। अदालत ने इन सभी की अर्जियों को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने से आजम खान के करीबियों को बड़ा झटका लगा था। क्योंकि इन सभी को अब निचली अदालत में ट्रायल से गुजरना होगा।
आजम खां खुद तो अपने बुने हुए जाल में फंसे हुए ही हैं, अपने साथ अपने करीबियों को भी फांसते चले जा रहे हैं। जौहर ट्रस्ट में शामिल 72 सदस्यों के सामने ही संकट खड़ा हुआ है। इनमें विधायक नसीर खां भी शामिल हैं, ट्रस्ट के सदस्य होने के नाते उन पर भी संकट है, क्योंकि अगर इन मामलों में ट्रायल के बाद सजा होती है तो कम से कम तीन साल की सजा का प्रावधान दर्ज मुकदमों में है। लिहाजा चमरौआ की विधायकी पर भी संकट मंडरा सकता है। क्योंकि हाईकोर्ट के इस आदेश से यह साफ हो गया है कि सरकारी अमले ने रामपुर में जो कार्यवाही की है वह पूरी तरह सही व निष्पक्ष थी. सरकारी अमले के कदम पर हाईकोर्ट ने अपनी मुहर लगा दी है।- नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां, पूर्व मंत्री
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