अयोध्या: हे भगवान! रोजगार की गारंटी देने वाली योजना में ही लटका है करोड़ों का भुगतान, मजदूर परेशान
अमृत विचार, अयोध्या। एक ओर अयोध्या में अरबों की परियोजनाएं चल रही हैं तो वहीं महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना पूरी तरह से बेपटरी हो गई है। रोजगार की गारंटी देने वाली इस महत्वाकांक्षी योजना में मजदूरों का करोड़ों का भुगतान लटका हुआ है। इससे पहले योजना में कम काम मिलने का प्रकरण सामने आ चुका है।
रोजगार की गारंटी देने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। सरकार के भरोसे पलायन न करने वाले मनरेगा मजदूर योजना में काम कर पछता रहे हैं। दो माह से मनरेगा मजदूरों को योजना के तहत स्वीकृत कार्यों में किए गए काम का भुगतान नहीं किया गया है। मजदूरों के घरों में फांकाकशी की नौबत है।
मनरेगा योजना में जनपद में औसतन दस हजार श्रमिक प्रतिदिन काम कर रहे हैं। 60 फीसदी श्रमांश के अनुपात में 40 फीसदी सामग्री अंश भी मनरेगा कार्यों में लगाई जा रही है। रोजगार की गारंटी देने वाली योजना में जनपद में एक दिन में ही लाखों लाख रुपए खर्च हो रहे हैं पर मनरेगा मजदूरों को उनकी मजदूरी के भुगतान की गारंटी कोई नहीं दे रहा है। लगभग दो माह हो चुके हैं और मनरेगा मजदूरों को अब तक उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है।
12 करोड़ से अधिक की मजदूरी और आठ करोड़ से अधिक का सामग्री अंश का भुगतान लटका हुआ है। इसे लेकर जिम्मेदार भी गोलमोल जवाब दे रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि मनरेगा में भुगतान न होने के कारण गांवों के विकास कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। मुख्य विकास अधिकारी अनीता यादव का कहना है कि मजदूरी भुगतान में विलंब नहीं है।
प्रत्येक चरण पर समयबद्ध तरीके से जिम्मेदार भुगतान पत्रावलियों को आगे बढ़ा रहे हैं। मनरेगा के स्टेट पूल एकाउंट में धनराशि आते ही भुगतान कर दिया जाएगा। एक सप्ताह के भीतर मनरेगा श्रमिकों के बैंक खातों में उनकी मजदूरी दे दी जाएगी।
मनरेगा में विलंबित भुगतान पर हजार्ने का कानून भी बेमानी
मनरेगा अधिनियम में कार्य समाप्त होने के 15 दिन के भीतर मनरेगा मजदूरों को उनकी मजदूरी दिए जाने का प्राविधान किया गया है। देरी होने की स्थिति में जिम्मेदार कर्मचारी के मानदेय/वेतन से कटौती का प्रावधान है, लेकिन यहां इसका अनुपालन इसलिए नहीं हो रहा है कि मनरेगा के खाते में धनराशि न होने की दशा में हजार्ने का कोई प्राविधान नहीं किया गया है। ऐसे में यह कानून भी मनरेगा मजदूरों के लिए बेमानी साबित हो रहा है।
