बरेली: घोटाले की पोल पर लटक रहीं फैंसी लाइटें, नहीं झेल पाई हवा का झोंका

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली,अमृत विचार। गांधी उद्यान के पास से डेलापीर चौराहे तक की लगीं 2.79 करोड़ की फैंसी लाइटों को लगाने में बड़े पैमाने पर गोलमाल किए जाने की आशंका है। एक पोल 70 हजार में खरीदकर लगाया है। घटिया किस्म के लगाए गए पोल शनिवार को हल्की बारिश के बीच हवा से धराशायी हो गए। कुछ …

बरेली,अमृत विचार। गांधी उद्यान के पास से डेलापीर चौराहे तक की लगीं 2.79 करोड़ की फैंसी लाइटों को लगाने में बड़े पैमाने पर गोलमाल किए जाने की आशंका है। एक पोल 70 हजार में खरीदकर लगाया है। घटिया किस्म के लगाए गए पोल शनिवार को हल्की बारिश के बीच हवा से धराशायी हो गए। कुछ दिन पहले ही मेयर डा. उमेश गौतम ने उद्घाटन किया था।

महज एक पखवारे के भीतर ही पोल लगाने के खेल पर पर्दा डालने के लिए नगर निगम के पथ प्रकाश ने फौरन गिरे पोल को छिपा दिया। ताकि घोटाले की पोल न खुल जाए। गांधी उद्यान से डेलापीर चौराहे तक गाजियाबाद की एक फर्म ने नए किस्म की लाइटों को लगवाया है। 14 वें वित्त के बजट से करीब 250 लाइटों के लगवाने के लिए 2.79 का बजट खपाया गया है।

इस रकम को खपाने के लिए 70 हजार के एक पोल की खरीदारी की गई है। जबकि इसकी कीमत 35 हजार के करीब है। इस पर तीन लाइटें लगाई हैं। इसमें से कई ऐसी लाइटें हैं,जो लगाने के साथ फूट चुकी हैं। कुछ तो रोशनी भी नहीं दे रही हैं। अब बरसात के मौसम में लाइटों के लगाने के नाम पर हुए खेल की पोल खुलने लगी है। सुबह हुई बारिश में एक के बाद तीन पोल अचानक टूट गिर गए। इसकी भनक लगते ही कुछ ही समय में नगर निगम का पथ प्रकाश विभाग का वाहन पहुंचा और पोल को लेकर चला गया। इसके कारण कई जिम्मेदार अफसरों को भनक तक नहीं लगी।

मानकों की अनदेखी
करोड़ों के बजट से लगी लाइटों के लगाने में मानकों की अनदेखी खूब की गई है। अपनी मनमर्जी से निर्धारित मूल्य से अधिक पर खरीदारी की गई है। जो सामान कम मूल्य के थे, उनके मूल्य का आकलन लोक निर्माण विभाग से कराया गया। लेकिन महंगे दामों के सामानों को अपनी मर्जी की कीमत लगा कर खरीदारी गई है। पूरी निविदा में महज 50 लाख का सामान लोक निर्माण विभाग के मानक के मूल्य के आधार पर खरीदा गया है।

खपाया बजट
नगर निगम ने काफी पहले विकास भवन से श्यामगंज तक लाइट लगवा चुका है। डेलापीर चौराहे के सड़क पर बीडीए ने डिवाइडर बनवा कर लाइट लगवाईं थी। इसके बावजूद भी करोड़ों की रकम को खपा दिया गया है। इन जगहों पर स्मार्ट सिटी के तहत लाइटें लगनी हैं। वहीं, चहेते ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए लाइट लगावाने का काम कराया दिया गया है। इससे साफ जाहिर है कि विभागीय मिलीभगत से करोड़ों का खेल किया गया है। नगर निगम के पथ प्रकाश प्रभारी राजीव शर्मा ने बताया कि कोई भी पोल नहीं गिरा है। कोई भी व्यक्ति देख सकता है सभी पोल जैसे पहले थे, उसी तरह हैं।

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