बरेली: बिजली के पोल नहीं दो इंच के पाइप पर लटकाईं महंगी लाइटें

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली,अमृत विचार। गांधी उद्यान से डेलापीर चौराहे तक लगीं 2.79 करोड़ की फैंसी लाइटों को लगाने में बड़ी अनियमितताएं बरती गई हैं। कास्ट आयरन के खंभे की जगह छोटे हैंडपंप वाले दो इंच के पाइपों पर फैंसी लाइटों को लगा दिया गया। आर्मामेंटल पोल लगाने के नाम पर करोड़ों का भुगतान भी करा लिया गया। …

बरेली,अमृत विचार। गांधी उद्यान से डेलापीर चौराहे तक लगीं 2.79 करोड़ की फैंसी लाइटों को लगाने में बड़ी अनियमितताएं बरती गई हैं। कास्ट आयरन के खंभे की जगह छोटे हैंडपंप वाले दो इंच के पाइपों पर फैंसी लाइटों को लगा दिया गया। आर्मामेंटल पोल लगाने के नाम पर करोड़ों का भुगतान भी करा लिया गया। मानकों धज्जियां उड़ाते हुए तकनीकी की जगह सिविल इंजीनियर के पर्यवेक्षण में कार्य कराया गया है। घोटाले का इरादा रखने वालों ने जब निविदा निकाली तभी बड़ी साजिश रच दी थी। अपने चहेती फर्म को भुगतान कराने के चक्कर में निविदा का प्रकाशन भी बरेली के समाचार पत्रों में नहीं कराया गया।

महज चंद दिनों में ही डिवाइडर पर लगे आर्मामेंटल पोल के घोटाले का राज खुलने लगा है। हल्की हवा के झोंके ने घोटाले बाजों की कलई खोल दी। सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो पोल लगाने से भुगतान तक विभागीय मिलीभगत से बड़ा खेल किया गया है। जिस पोल के नाम पर 70 हजार का भुगतान किया गया है। वह बिजली का पोल नहीं, सिर्फ दो और चार इंच के पानी के पाइप को खरीद कर पालिश कर लाइटें लगा दी गईं। इसके बाद फैंसी लाइट लगाने के नाम पर अलीगढ़ की एक फर्म को 14 वें वित्त से 2.79 का बजट का भुगतान भी कर दिया गया है।

अगर निमयों की बात करे तो एक करोड़ के बिजली से संबंधित कार्य बिजली के विभाग के पर्यवेक्षण में कराया जाना चाहिए था। इसके बदले में बिजली तकनीकी इंजीनियरों को भुगतान के लिए 14 प्रतिशत धनराशि निविदा मद से लेती है। नगर निगम ने सिविल डिप्लोमा धारक इंजीनियर को पर्यवेक्षण में लगा दिया। इसके बाद कार्य पूरा कर भुगतान कर दिया गया है।

इतना ही नहीं जब निविदा निकाली तो स्थानीय समाचार पत्रों में इसका प्रकाशन तक नहीं कराया गया। इससे जिम्मेदारों की मंशा पर सवाल खड़ा हो रहे है क्योंकि नियमानुसर 40 लाख से अधिक निविदा में टु बिड प्रक्रिया अपनानी होती है, लेकिन यहां पर अनदेखी की गई है। जो फैंसी लाइटें लगाई गई हैं, वह भी ब्योरा आफ एनर्जी इफिसियंसी के मानकों पर खरी नहीं हैं।

बड़े शहरों की तर्ज पर लगे आर्मामेंटल पोल पर करीब 250 लाइटों को लगाने में इंडियन ट्रैफिक इंजिनियरिंग और नेशनल लाइटिंग कोड के निर्धारत नियमों का भी पालन नहीं किया गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि निविदा निकालने से भुगतान तक योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया गया है।

हथौड़े से तोड़ा गया है पोल, एफआईआर कराएंगे
बिजली के पोल को किसी ने हथौड़े से तोड़ा है। ऐसा करने वाले का नाम प्रकाश में आ चुका है। मौके पर हथौड़ों के निशान मिला है। सोमवार को नगर निगम की तकनीकी टीम को मौके पर जांच के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद सरकारी संपत्ति को नुकसान करने और छवि खराब करने वाले के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। -डा. उमेश गौतम, मेयर

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