अयोध्या : विवाह पंचमी पर गाजे-बाजे के साथ निकली रामबारात

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Edited By Amrit Vichar
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मठ-मंदिरों में आयोजित हुई विवाह की रस्म, कलेवा कल

अमृत विचार, अयोध्या। रामनगरी में राम विवाहोत्सव का उल्लास सोमवार को उफान पर दिखा। जगह-जगह विभिन्न मठ-मंदिरों से गाजे-बाजे के साथ राम बारात निकली और वापस मठ-मंदिर पहुंचने पर वैदिक रीति रिवाज के साथ विवाह की रस्म संपन्न हुई। मंगलवार को राम कलेवा का आयोजन होगा।

पौराणिक मान्यता के मुताबिक त्रेतायुग में मार्ग शीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को माता सीता और श्रीराम का विवाह हुआ था। तभी से इस तिथि को विवाह तिथि पंचमी के रूप में मनाया जाता है।  माता सीता के मायके जनकपुर में तो भव्य समारोह का आयोजन होता ही है। रामनगरी के प्रतिष्ठित मठ-मंदिरों में राम विवाहोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। विवाह के पूर्व की रस्म तिलक, तेल पूजन व मातृपूजन के बाद आज हल्दी की रस्म हुई तथा कनक भवन, रंग महल, लक्ष्मण किला, रामहर्षण कुंज, दिव्यकला कुंज, हनुमानबाग समेत एक दर्जन मठ-मंदिरों से राम बारात निकाली गई। 

राम बारात ने आसपास मुख्य मार्ग पर भ्रमण किया। बाराती के रूप में शामिल श्रद्धालु व भक्तों ने जयकारे लगाए तथा भक्तिभाव में नाचते नजर आए। बारातों के वापस लौटने के बाद राम व सीता के विग्रह का वैदिक परंपरा के मुताबिक विवाह संस्कार संपन्न हुआ। श्रीराम के पिता दशरथ की भूमिका संबंधित मंदिर के महंत और माता सीता के पिता जनक की भूमिका यजमान ने निभाई। रामनगरी के अन्य मठ-मंदिरों मणिराम दास छावनी, सियाराम किला, सद्गुरु सदन, हनुमानकिला आदि में भी राम विवाहोत्सव का आयोजन हुआ। 

राम विवाह देखने को भारी भीड़ उमड़ी, जिससे राम नगरी रातभर गुलजार रही। प्रदेश की शिक्षा मंत्री गुलाबा देवी भी पहुंचीं और रंग महल के राम बारात में जमकर नाचीं। राम बारात के अवसर पर सांसद लल्लू सिंह, नगर विधायक वेदप्रकाश गुप्ता, महापौर ऋषिकेश उपाध्याय सहित अन्य विशिष्ट जन भी मौजूद रहे। 

रामलला को लगाया गया छप्पन भोग

- राम विवाहोत्सव के अवसर पर विवाह पंचमी को राम जन्मभूमि परिसर स्थित अस्थाई मंदिर में बाल रूप में विराजमान रामलला तथा उनके भाइयों लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न को छप्पन लगाया गया। साथ ही विशेष आरती की गई।  रामलला के अर्चक संतोष तिवारी ने बताया कि विवाह पंचमी पर रामनगरी के सभी मठ-मंदिरों में विवाहोत्सव का आयोजन होता है। यहां भगवान राम बाल रूप में विराजमान है। इसलिए यहां से न तो बारात निकाली जाती है और न ही विवाह की रस्म संपन्न होती है। उनका कहना है कि विवाह पंचमी पर रामलला को छप्पन व्यंजन का भोग लगाया गया है और विशेष आरती की गई है।

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