हर विद्यालय में शिक्षकों को सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण दिया जाना अनिवार्य हो : डॉ लीना मिश्र
अमृत विचार लखनऊ। बालिका विद्यालय इंटरमीडिएट कॉलेज, मोती नगर, में अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगता दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र द्वारा इस विशेष दिवस के महत्व और संबंधित अनेक ऐसी प्रतिभाओं जैसे अष्टावक्र, सतीश गुजराल, रामभद्राचार्य, आइंस्टीन, स्टीफन हॉकिंग, हेलन केलर, रविंद्र जैन, रूजवेल्ट आदि के व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में विस्तार से बातचीत की।
प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र ने छात्राओं को बताया कि शारीरिक या मानसिक अक्षमता व्यक्ति में प्रायः प्राकृतिक कारणों से आती है और इससे पीड़ित बच्चों या व्यक्तियों में अपने जीवनयापन करने के लिए एक विशेष क्षमता भी विकसित हो सकती है। उन्होंने कहा कि हम सबको प्रयास यह करना चाहिए कि उनकी विशेष क्षमता को विकसित होने का वातावरण सृजित करते हुए उन्हें सक्षम बनाएं और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनमें सामाजिक और राष्ट्रीय सरोकार विकसित करें।
हमें हमेशा महसूस करने की आवश्यकता है कि दिव्यांग भी हमारे ही परिवार और समाज का हिस्सा हैं और इस दुनिया में उन्हें अपना जीवन जीने तथा अपने सपने साकार करने का पूरा हक है। उन्होंने कहा कि समुचित विकास के लिए बाधारहित संस्थानों और कार्यस्थलों की परिकल्पना, ब्रेल लिपि, ऑडियो-विज़ुअल आदि का विकास करते हुए, रैलियों, नुक्कड़ नाटक, पोस्टर और अन्य प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जागरूकता पैदा करना चाहिए ताकि उन्हें प्रभावी ढंग से प्रेरित और प्रोत्साहित करते हुए और सक्षम बनाया जा सके। यह कार्य सरकार अपने तरीके से तो करती ही है, गैरसरकारी संगठनों को भी सामने आना चाहिए। इसी से दिव्यांगों के प्रति समाज के लोगों का नजरिया बदलेगा और उनमें भी अपने दायित्व को समझते हुए कर्तव्यपारायणता का बोध होगा।
