भारत, जर्मनी ने द्विपक्षीय सहयोग पर विस्तृत चर्चा की, समग्र प्रवासन आवाजाही साझेदारी समझौते पर किए हस्ताक्षर

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Edited By Amrit Vichar
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नई दिल्ली। भारत और जर्मनी ने ऊर्जा, कारोबार और जलवायु परिवर्तन सहित द्विपक्षीय सहयोग को प्रगाढ़ करने एवं यूक्रेन संघर्ष सहित वैश्विक मुद्दों पर सोमवार को विस्तृत चर्चा की तथा समग्र प्रवासन एवं आवाजाही साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए जिससे लोगों के लिए एक-दूसरे के देश में पढ़ाई, शोध और काम करना आसान होगा। दोनों देशों ने हिन्द प्रशांत, यूक्रेन संघर्ष, अफगानिस्तान की स्थिति, पाकिस्तान से जुड़े मुद्दे, सीरिया की स्थिति सहित क्षेत्रीय एवं वैश्विक विषयों पर विचारों का आदान प्रदान किया।

बैठक के बाद जर्मनी की विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक के साथ संयुक्त प्रेस संबोधन में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि आवाजाही साझेदारी समझौते से एक-दूसरे देश में पढ़ाई, शोध और काम करना आसान होगा तथा यह समझौता दोनों देशों के बीच अधिक समकालीन द्विपक्षीय साझेदारी के आधार का मजबूत संकेत है। जयशंकर ने रूस से कच्चे तेल के आयात का मजबूती के साथ बचाव किया और कहा कि यह बाजार से जुड़े कारकों से प्रेरित हैं । उन्होंने कहा कि फरवरी से नवंबर तक यूरोपीय संघ ने रूस से अधिक मात्रा में जीवाश्म ईंधन का आयात किया है।

उनसे पूछा गया था कि भारत क्यों रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। वहीं, बेयरबॉक ने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया कठिन परिस्थितियों का सामना कर रही है तो हमारे लिये मिलकर आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है। क्षेत्र को चीन की चुनौतियों के बारे में एक प्रश्न के जवाब में जर्मनी की विदेश मंत्री ने कहा कि खतरों का आकलन करने की जरूरत है । उन्होंने साथ ही चीन को कई मायने में प्रतिस्पर्धी बताया ।

बेयरबॉक दो दिवसीय यात्रा पर सोमवार को भारत पहुंची। उनकी यात्रा ऐसे समय में हुई है जब चार दिन पहले ही भारत ने जी20 समूह की औपचारिक अध्यक्षता ग्रहण की है। जयशंकर ने कहा, ‘‘ हमने अफगानिस्तान की स्थिति और पाकिस्तान के बारे में चर्चा की जिसमें सीमा पार आतंकवाद से जुड़ा विषय भी शामिल था।’’ उन्होंने जोर दिया कि अगर सीमा पार से आतंकवाद जारी रहता है तो पाकिस्तान के साथ बातचीत नहीं हो सकती। जयशंकर ने कहा कि हमने हिन्द प्रशांत के विषय और ईरान के मुद्दे पर भी चर्चा की ।

उन्होंने कहा कि विभिन्न विषयों पर जर्मनी की विदेश मंत्री के विचारों को सुनना काफी उपयोगी और फलदायक रहा । उन्होंने कहा कि हमने लचीली आपूर्ति श्रृंखला सृजित करने और डिजिटल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के बारे में भी चर्चा की। इसके साथ ही हमारी चर्चा में अधिक सुरक्षित वैश्विक अर्थव्यस्था का विषय भी रहा । विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि हमने लोगों से लोगों के बीच सम्पर्क को बढ़ाने पर चर्चा के साथ ही इस दिशा में समग्र प्रवासन एवं आवाजाही साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए जिससे लोगों के लिए एक-दूसरे के देश में पढ़ाई, शोध और काम करना आसान होगा। जयशंकर ने कहा कि हमारी चर्चा में वीजा से जुड़ा मुद्दा भी उठा ।

 बेयरबॉक ने कहा कि दुनिया कठिन परिस्थितियों का सामना कर रही है और इस समय में भारत ने जी20 की अध्यक्षता ग्रहण की है, साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का मासिक अध्यक्ष भी बना है। उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ सुरक्षा सहयोग को और बढ़ाना चाहते हैं जो सबसे बड़ा लोकतंत्र और उभरती हुई अर्थव्यवस्था है तथा दुनिया के अनेकों देशों के लिये आदर्श है। यूक्रेन पर रूस के हमले की स्थिति के संबंध में बेयरबॉक ने कहा कि जर्मनी ने नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का समर्थन किया है जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप हो।

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन मुद्दे पर भारत का रुख स्पष्ट है कि यह युद्ध का युग नहीं है और बातचीत के जरिये समाधान निकाला जाना चाहिए। इससे पहले, बेयरबॉक ने अपने बयान में भारत को जर्मनी का नैसर्गिक साझेदार बताया । उन्होंने कहा कि 21वीं सदी, खास तौर पर हिन्द प्रशांत क्षेत्र में विश्व व्यवस्था को आकार प्रदान करने में भारत की निर्णायक भूमिका होगी और भारत की यात्रा करना दुनिया के छठे हिस्से की यात्रा करने जैसा है। उन्होंने कहा, ‘‘ भारत सरकार ने न केवल जी20 में महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है बल्कि अपने देश के लिए भी एक लक्ष्य रखा है। 

जब नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार की बात आती है तब भारत ऊर्जा परिवर्तन (उपयोग) में पहले से ज्यादा आगे बढ़ना चाहता है और इसमें जर्मनी, भारत के साथ खड़ा है।’’ बेयरबॉक ने कहा कि जलवायु संकट के असर से हम सभी प्रभावित हुए हैं, यूरोप और भारत में भी आजीविका को नुकसान पहुंचा है, ऐसे में हम आर्थिक, जलवायु क्षेत्र और सुरक्षा नीति को लेकर अपने सहयोग को सामरिक गठजोड़ के स्तर से आगे ले जाना चाहते हैं और यह केवल खोखली बातें नहीं हैं । इस बीच, अधिकारियों ने कहा कि दोनों विदेश मंत्रियों के बीच बैठक के दौरान ऊर्जा, कारोबार और जलवायु परिवर्तन सहित द्विपक्षीय सहयोग को प्रगाढ़ बनाने जैसे विषय चर्चा के एजेंडे में प्रमुख रहे ।

बैठक से पहले विदेश मंत्री जयशंकर ने बेयरबॉक के साथ चित्र साझा करते हुए ट्वीट किया, ‘‘ भारत में आपका स्वागत है।’’ बेयरबॉक के सोमवार को भारत पहुंचने पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट कर कहा, ‘‘ अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर नयी दिल्ली पहुंचने पर जर्मनी की विदेश मंत्री बेयरबॉक का स्वागत है। यह हमारे सामरिक गठजोड़ में प्रगति की समीक्षा करने तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक घटनाक्रम पर विचारों का आदान प्रदान करने का अवसर है।’’ भारत और जर्मनी ने वर्ष 2021 में अपने राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ मनायी थी। इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी छठे भारत-जर्मनी अंतर सरकारी सम्मेलन में हिस्सा लेने बर्लिन गए थे । इसके अलावा भारत जी7 देशों की बैठक में सहभागी देश के रूप में शामिल हुआ था 

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