कानपुरवासियों को नहीं मिल रही जाम के झाम से मुक्ति, यातायात हो रहा आउट ऑफ कंट्रोल, जानें इसकी वजह
कानपुर में रोजाना राहगीरों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है।
कानपुर में यातायात पुलिस के तमाम दावें होने के बाद भी लोगों को जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा है। सहालग होने के कारण शाम होते ही चौतरफा जाम लग जाता है। जिससे चारपहिया, दोपहिया के साथ पैदल चलने वालों को भी घंटों जूझना पड़ता है।
कानपुर, अमृत विचार। यातयात विभाग के तमाम दावों और प्रयासों के बावजूद शहर को जाम के झाम से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। सहालगों के चलते बेतरतीब ट्रैफिक और अव्यवस्था के कारण शाम होते-होते शहर जाम से जकड़ जाता है। घंटों मशक्कत के बाद लोग अपने गंतव्य तक पहुंच पाते हैं। शहर का ध्वस्त यातायात अब पूरी तरह से आउट ऑफ कंट्रोल हो चुका है।
सोमवार को दोपहर से जरीब चौकी चौराहा, हैलट पुल, रावतपुर, ग्वालटोली, वीआईपी रोड, सूटरगंज, सिविल लाइंस, चुन्नीगंज, लाटूश रोड, घंटाघर, अनवरगंज, मूलगंज, यतीमखाना, परेड अस्पताल रोड, चेतना चौराहा, पनचक्की चौराहा समेत दर्जनों क्षेत्रों में जाम लगा हुआ था। जिसमें सैकड़ों वाहन सवार फंसकर जाम से जूझते नजर आये।
जाम की मुख्य वजह इन मार्गों में पड़ने वाले गेस्ट हाउस और लॉन आदि में रोड किनारे खड़े होने वाले चौपहिया वाहन व अराजकता की निशानी ई-रिक्शा चालक थे। जाम में कई स्कूलों के बच्चे भी फंसे रहे। जिन्हें घोर परेशानियों का सामना करना पड़ा। यह स्थिति शहर में दोपहर से लेकर रात तक देखने को मिली।
बेतरतीब पार्किंग और आरामतलबी पुलिस बनती है वजह
बेतरतीब वाहनों की पार्किंग और ट्रैफिक पुलिस की आरामतलबी के चलते शहर का यातायात पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। रविवार को छोड़कर रोजाना रुक-रुककर पूरा शहर जाम में जकड़ा रहता है। शहर के मुख्य मार्गों में दिनभर में कई बार वीआईपी और वीवीआईपी समेत दर्जनों मरीजों से भरी एंबुलेंसे गुजरती और फंसती हैं, लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी कोई एक्शन नहीं ले रहे हैं।
अतिक्रमण भी बड़ी मुसीबत
शहर के सभी बाजारों में नगर निगम और थाना पुलिस की गठजोड़ से अतिक्रमण फलफूल रहा है। सड़के और फुटपाथ अतिक्रमणकारी पूरी तरह से लील गए हैं। किसी भी बाजार में खरीदारी करने वाला वाहन लेकर नहीं जा सकता है। चालीस फुट का रास्ता मात्र दस फुट का ही रह गया है। बीच सड़क में ठेलिया दुकानदार दबंगई से काबिज हो जाते है कई बार जिला प्रशासन के निर्देश पर अतिक्रण विराधी अभियान भी चलाया जाता है लेकिन कुछ दिन बाद ही स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है।
