परमात्मा को वंदन से बांध सकते हैं : जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य
अमृत विचार, पूराबाजार, अयोध्या। नंदीग्राम भरतकुंड के प्राचीन श्रीराम जानकी मंदिर में महंत बिंदुगद्याचार्य देवेंद्र प्रसदाचार्य की अध्यक्षता में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा में जगद्गुरु राम दिनेशाचार्य ने कहा कि वेद प्रभु सम्मत उपदेश है। परमात्मा उपदेश ही करते हैं। वंदन को भक्ति कहा गया है। ये हमारी संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण हैं। परमात्मा को वंदन करने से बांध सकते हैं। परमात्मा को गुण से नहीं बाधा जा सकता।
उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के चरित्र में माधुर्य हैं। राम जी का जो घर हैं वही रामायण है। उन्होंने कहा कि भगवान को अयोध्या बहुत प्रिय हैं। भगवान ने कहा है कि मै बैकुण्ठ का त्याग कर आ सकता हूँ। यहाँ के लोग भगवान को बहुत प्रिय है। रामकथा एक प्रवाह है। राम धर्म के विग्रह हैं। कोई हमारा अपमान कर दे हम उत्तर उसका सम्मान से दें वही धर्म है।
भगवान ने हमेशा यहीं किया है। भगवान अयोध्या वासियों को अत्यंत प्रेम करते हैं। अयोध्या वासियों पर भगवान की बहुत बड़ी कृपा हैं। इस अवसर पर दिवाकर सिंह, प्रथ्वीराज सिंह, पवन पाण्डेय, शिव कुमार मिश्रा सहित कई भक्त मौजूद रहे।
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