बरेली: रक्षासूत्र के पवित्र बंधन पर कोरोना ने लगाया ग्रहण

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सिद्धार्थ भारद्वाज, बरेली।  इस बार रक्षासूत्र के पवित्र बंधन पर कोरोना ने ऐसा ग्रहण लगाया है कि संक्रमण की चपेट में आए सैकड़ों व्यक्ति अपनी बहनों की सुरक्षा का संकल्प नहीं दोहरा पाएंगे। वहीं, बहनें भी संक्रमित हैं जो राखी लेकर भाइयों के घर नहीं पहुंच पाएंगी। रक्षाबंधन ऐसा पवित्र बंधन है, जो रेशम की …

सिद्धार्थ भारद्वाज, बरेली।  इस बार रक्षासूत्र के पवित्र बंधन पर कोरोना ने ऐसा ग्रहण लगाया है कि संक्रमण की चपेट में आए सैकड़ों व्यक्ति अपनी बहनों की सुरक्षा का संकल्प नहीं दोहरा पाएंगे। वहीं, बहनें भी संक्रमित हैं जो राखी लेकर भाइयों के घर नहीं पहुंच पाएंगी।

रक्षाबंधन ऐसा पवित्र बंधन है, जो रेशम की डोरी के जरिए भाई-बहन के प्‍यार को हमेशा-हमेशा संजोकर रखती है। रक्षाबंधन का त्‍योहार हर साल पूरे हर्षोल्‍लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी (रक्षासूत्र) बांधकर उसकी लंबी आयु की कामना करती हैं। वहीं भाई बहन की सुरक्षा का संकल्प दोहराने के साथ उपहार में कई चीजें देते हैं। इस त्‍योहार को हिन्‍दूओं के अलावा कई अन्‍य धर्म के लोग भी धूमधाम से मनाते हैं। लेकिन रक्षाबंधन पर इस बार कोरोना ने ऐसा ग्रहण लगाया कि हजारों भाई-बहन पवित्र बंधन को ठीक से मना नहीं सकेंगे।

जनपद में रोजाना निकल रहे कोरोना संक्रमितों में किसी का भाई तो किसी की बहन अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनका उपचार चल रहा है। ऐसे में सैकड़ों बहनें अपनी भाईयों की कलाई पर राखी बांधने से वंचित रह जाएंगी। वहीं इस त्योहार को लेकर सुरक्षा की दृष्टि से स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी कोई इंतजामात नहीं किए गए हैं।

संक्रमितों का छलका दर्द
मूर्ति नगर नर्सिंग होम नरकुलागंज थाना प्रेमनगर निवासी संक्रमित युवक बताते हैं कि वह हर साल अपनी बहन से कलाई पर राखी बंधवाते हैं। उपहार भी देते हैं। इस त्योहार का उन्हें पूरे सालभर इंतजार रहता है। इस बार बीमारी की वजह से राखी नहीं बंधवा पाऊंगा। इसका मुझे काफी दुख है।

नेकपुर निवासी एक महिला बताती हैं कि उनका मायका आलमगिरीगंज में है। उनका एक ही भाई है। हर साल मैं घर जाकर भाई को राखी बांधती हूं, लेकिन इस बीमारी की वजह से कोविड अस्पताल में भर्ती हूं, ऐसे में न तो मैं वहां जा सकूंगी और न ही वह मेरे पास आ सकेंगे। घर पर राखी भिजवा दी है। मेरी भतीजी ही राखी बांध देगी।

ललिता देवी मंदिर नेकपुर की एक युवती को भी सोमवार को कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। वह अपने घर पर ही होम आइसोलेट हैं। बताती हैं कि मैं मकान में ऊपरी मंजिल पर रह रही हूं, घर वाले दूर से ही खाना दे देते हैं। पहली बार होगा कि अपने भाई को राखी नहीं बांध पाऊंगी। इसका दुख तो है लेकिन वह हमेशा सही रहे। यही ईश्वर से प्रार्थना है।

कोरोना संक्रमित होने की वजह से मुझे कोविड अस्पताल एल-2 में भर्ती किया गया है। मठ लक्ष्मीपुर, इज्जतनगर में मेरा मायका है। हर साल वहां जाकर राखी बांधती हूं, यह दिन कैसे बीत जाता है। इसका पता ही नहीं चलता है। इस बार बीमारी की वजह से राखी नहीं बांध पाऊंगी। मेरे तीन भाई हैं, घर पर राखी भिजवा दी हैं, छोटी बहन ही बांध देगी।

विदेशों से आई, संक्रमण ने अस्पताल पहुंचा दिया
पिछले एक सप्ताह के आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो एक दर्जन के करीब ऐसी युवतियां और महिलाएं हैं जो रक्षाबंधन पर अपने भाईयों को राखी बांधने के लिए विदेशों से घरों को लौटी हैं, लेकिन यहां आकर वह कोरोना के जाल में जकड़ गईं। अमृत विचार के संवाददाता ने उनसे फोन पर बात की तब उन्होंने बताया कि वह केवल रक्षाबंधन की वजह से ही वापस लौटी थीं, लेकिन यहां आकर रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर भाईयों की कलाई पर राखी नहीं बांध पाएंगी। भाई और घर पर सुरक्षित रहें। यही उनकी भगवान से प्रार्थना है।

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