बरेली: 47 करोड़ के घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू को सौंपी, शहला ताहिर की मुश्किलें बढ़ीं

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली/नवाबगंज, अमृत विचार। नगरीय निकाय चुनाव 2022 की बिसात बिछ गई है। नवाबगंज से शहला ताहिर फिर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। इस बीच राज्य सरकार ने शहला ताहिर के 2012 से 2017 तक पालिकाध्यक्ष रहने के दौरान के कार्यकाल में 47 करोड़ रुपये की अनियमितताएं होने के आरोपों के प्रकरण की जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) को सौंप दी है। उस कार्यकाल में विशिष्ट आडिट हुआ, जिसकी जांच में शहला ताहिर पर आरोप लगे थे। उस वक्त विशिष्ट ऑडिट में 47 करोड़ की वित्तीय अनियमितताएं पाई गई थीं। 

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अब गोपन विभाग प्रकरण में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन से जांच करा रहा है। इससे शहला ताहिर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। वहीं प्रकरण की जांच के बीच राज्य सरकार शहला ताहिर बनाम उप्र राज्य व अन्य में हाईकोर्ट की खंडपीठ के निर्णय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। मामले में विशेष सचिव सुनील कुमार चौधरी ने 12 दिसंबर को मुख्य स्थायी अधिवक्ता उच्च न्यायालय इलाहाबाद को भी पूरा मामला बताते हुए चार पेज की चिट्ठी लिखी।

जिसमें सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुज्ञा याचिका दाखिल करने के संबंध में विधिक परामर्श तीन दिन में शासन को उपलब्ध कराने की बात कही है। विशेष सचिव ने जिलाधिकारी बरेली को भी कहा है कि प्रकरण से भिज्ञ किसी अधिकारी को मुख्य स्थायी अधिवक्ता से संपर्क स्थापित कर विधिक राय प्राप्त करने को निर्देशित करें। इधर, इस संबंध में शहला ताहिर का कहना है कि मुझे जांच होने या शासन क्या करा रहा है, इसकी कोई जानकारी नहीं है। चिट्ठी देखने के बाद ही अपना पक्ष रख सकती हूं।

हाईकोर्ट से निरस्त आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार
जाति प्रमाणपत्र निरस्त होने के साथ वित्तीय अनियमितताओं व विभिन्न आरोपों की पुष्टि के बाद शासन के निर्देश पर शहला ताहिर को नवाबगंज नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष पद से 10 मई को बर्खास्त कर दिया था। जिलाधिकारी ने आदेश जारी किए थे।

शहला ताहिर ने शासन के आदेश के विरुद्ध हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की। 17 अगस्त को पारित हुए आदेश के अनुपालन में सरकार ने प्रकरण से संबंधित मूल अभिलेख न्यायालय में जमा कराए गए थे लेकिन केस की मजबूत पैरवी न होने की वजह से हाईकोर्ट की खंडपीठ ने प्रकरण की शासन द्वारा विधिवत जांच न कराने को आधार बनाते हुए शहला ताहिर को अध्यक्ष नगर पालिका परिषद नवाबगंज को पद से बर्खास्त करने के शासन के आदेश को निरस्त कर दिया था। इस मामले में अब राज्य सरकार हाईकोर्ट की खंडपीठ के निर्णय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है।

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