Kanpur Nagar Nigam अस्पतालों को आक्सीजन की दरकार, बंद होने की कगार पर आ रहे 43 अस्पताल, यह है मुख्य वजह
कानपुर नगर निगम के अस्पतालों को आक्सीजन की दरकार है।
कानपुर नगर निगम अस्पतालों को आक्सीजन की दरकार है। शहर में 43 नगर निगम के अस्पताल और डिस्पेंसरी की हालत खराब है। संबद्ध डॉक्टरों का 23 महीने से वेतन नहीं मिला है।
कानपुर, अमृत विचार। नगर निगम के अस्पतालों और डिस्पेंसरी की हालत दिन पर दिन बिगड़ती जा रही है। पहले से ही डॉक्टरों और संसाधनों की कमी झेल रहे अस्पतालों में अब नई मुसीबत सामने खड़ी हो गई है। नगर निगम से संबद्ध 17 डॉक्टरों को 23 महीनें से बढ़ा हुआ वेतन नहीं मिला है। कई चक्कर लगाने के बाद भी डॉक्टरों की समस्या खत्म नहीं हुई है। जिससे बाद अब कुछ डॉक्टरों ने डिस्पेंसरी जाना ही छोड़ दिया है। जिससे गरीब मरीजों का उपचार प्रभावित होने लगा है।
नगर निगम के शहर में 43 अस्पताल और डिस्पेंसरी हैं। इसमें से तीन अस्पताल चाचा नेहरू अस्पताल कोपरगंज, जागेश्वर अस्पताल गोविंद नगर और बीएन भल्ला अस्पताल बाबूपुरवा है। मौजूदा समय में यहां डॉक्टर और स्टाफ न के बराबर हैं। नगर निगम के कुछ कर्मचारी यहां कार्यरत हैं। कुर्सी, मेज, बेड समेत जरूरी संसाधन भी अस्पतालों में नहीं है। नगर निगम की डिस्पेंसरी की तो हालत और भी दयनीय है। कईयों का तो ताला तक नहीं खुलता है। जिससे जरूरतमंद मरीजों का उपचार नहीं हो पा रहा है।
सदन से पास होकर रखे गये डॉक्टर
नगर निगम के मृत अस्पतालों को जिंदा रखने के लिये सदन में प्रस्ताव पास कराकर पूर्व में कई डॉक्टरों को संबद्ध किया था। इसमें हाम्योपैथिक और एलोपैथिक दोनों डॉक्टर रखे गये। जो अवैतनिक रूप से कार्य करने को राजी हो गये। नगर निगम अपने मद से आठ हजार रुपये देता है। जिसको चार साल पहले डॉक्टरों ने महापौर प्रमिला पांडेय से मिलकर इसको 12 हजार करा लिया। लेकिन यह राशि डॉक्टरों को नहीं दी जा रही है।
नगर निगम के बाबू पर आरोप
नगर निगम से संबद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. हेमंत मोहन ने बताया कि नगर निगम कार्मिक विभाग में पूर्व में कार्यरत बाबू सभी डॉक्टरों से पैसे मांगता है। उन्होंने बताया कि कहता है कि पैसे दो तो फाइल बढ़वा दें नहीं तो आठ हजार ही मिलता रहेगा। उन्होंने बताया कि कई बार तो फाइल ही गायब हो गई। अब नया बाबू को तैनात किया गया है जिसके बाद फाइल मिली भी तो उसमें नगर आयुक्त हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं। हम सभी डॉक्टर इधर से उधर भटक रहे हैं। नगर स्वास्थ्य अधिकारी भी नहीं सुनते हैं।
अपने पास से दे रहे दवाइंयां
डॉ. आरती मोहन ने बताया कि हम लोग रोजाना डिस्पेंसरी जा रहे हैं। वहां दवा नहीं है इसलिये खुद ही लेकर जाते हैं और मरीजों को एक रुपये के पर्चे के बाद दवा देते हैं। बताया कि कई बार नगर निगम से कहा कि दवाइयां नहीं हैं, सुविधायें नहीं हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है। हम लोग सेवा भाव से जा रहे हैं।
