बहराइच: शिशु मृत्यु दर कम करने को जिले में तैयार हुआ पहला न्यू बोर्न एक्शन प्लान
अमृत विचार, बहराइच। जिले के नौनिहालों की सेहत सुधारने व शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए न्यूबार्न एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। इसके लिए चार राज्यों से आठ जिलों का चुनाव किया गया है। इनमें उत्तर प्रदेश के दो जनपद बहराइच व प्रयागराज शामिल हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा उठाया गया कदम नवजात को बचाने में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
जिले के एक होटल में बीते सप्ताह मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सतीश चंद्र की मौजूदगी में यूनिसेफ के सहयोग से देश की पहली जनपद स्तरीय कार्यशाला का आयोजन जनपद में हुई थी। इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के राज्य प्रतिनिधियों ने नवजात सुरक्षा के सभी पहलुओं पर चर्चा कर रणनीति तैयार की।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के महाप्रबंधक डॉ वेद प्रकाश ने बताया कि नवजात शिशु सुरक्षा के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2014 में आईएनए यानि इंडियन न्यूबार्न एक्शन प्लान प्रारंभ किया था। जिसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर नवजात मृत्य दर जो वर्ष 2014 में 26 प्रति 1000 जीवित जन्म थी उसमें शीघ्रता से कमी लाने के लिए नीति निर्माण करना था।
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इसके लिए वर्ष 2030 तक राष्ट्रीय स्तर पर नवजात मृत्यु दर को 10 प्रति 1000 जीवित जन्म तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। महाप्रबंधक ने बताया कि आईएनए की ओर से तय नीतियों व प्रयासों के चलते नवजात मृत्यु दर में काफी गिरावट आई है। एसआरएस 2020-22 के आंकड़ों के अनुसार बीते आठ वर्षों में राष्ट्रीय नवजात मृत्यु दर 26 से घट कर 20 प्रति 1000 जीवित जन्म तथा उत्तर प्रदेश में नवजात मृत्यु दर 32 से घट कर 28 प्रति 1000 जीवित जन्म है।
उन्होंने बताया कि आगामी 8 वर्षों में नवजात मृत्यु दर में शीघ्रता से कमी लाने के लिए भारत सरकार ने बीते माह जुलाई-अगस्त में चार राज्यों–उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, जम्मू कश्मीर एवं मेघालय के आठ जनपदों में बोटल नेक विश्लेषण किया तथा इसकी गैप एनालिसिस माह सितम्बर में साझा की। इसके आधार पर उत्तर प्रदेश के बहराइच जनपद में न्यूबार्न एक्शन प्लान तैयार किया गया है।
आगामी दिनों में प्रयागराज में भी कार्यशाला आयोजित कर एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा। बैठक में अवसर पर बिल मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन से डॉ विकास यादव, इंडिया हेल्थ एक्शन ट्रस्ट से डॉ रेनू श्रीवास्तव गोयल, अपर मुख्य चिकित्साअधिकारी डॉ पी0 के0 बांदिल सहित जनपद व ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य अधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
देखभाल के इन छह पहलुओं पर रहेगा जोर
यूनिसेफ की हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ कनुप्रिया सिंघल ने बताया कि नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के लिए मुख्यतः छह पहलुओं पर विशेष ज़ोर रहेगा। इनमें गर्भवती की प्रसव पूर्व देखभाल, प्रसव के दौरान देखभाल, शिशु जन्म के तुरंत देखभाल, स्वस्थ शिशु की देखभाल, बीमार शिशु की देखभाल व अस्पताल से लौटने के बाद बीमार शिशु की देखभाल शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि नवजात को स्वस्थ रखने के लिए एक घंटे के अंदर स्तनपान के साथ ही खतरे के लक्षणों वाली गर्भवती का उचित संदर्भन एवं उपचार करने में आशा, एएनएम, स्टाफ नर्स के साथ ही जनपद एवं राज्य स्तर से भी सभी को समुचित प्रयास करने की आवश्यकता है।
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