बरेली: बढ़ रहा कोरोना का खतरा, अगस्त में हो सकता है बेकाबू
सिद्धार्थ भारद्वाज, बरेली। अनलॉक टू में जुलाई महीने में कोरोना ने जिले में अपनी रफ्तार पकड़ ली या यूं कहिए कि जुलाई महीने में अगस्त महीने में कोरोना की बेकाबू होने वाली आहट देने लगी है। जून महीने के आखिरी में जहां जनपद में सक्रिय केसों की संख्या कुल 86 थी तो वहीं, 31 जुलाई …
सिद्धार्थ भारद्वाज, बरेली। अनलॉक टू में जुलाई महीने में कोरोना ने जिले में अपनी रफ्तार पकड़ ली या यूं कहिए कि जुलाई महीने में अगस्त महीने में कोरोना की बेकाबू होने वाली आहट देने लगी है। जून महीने के आखिरी में जहां जनपद में सक्रिय केसों की संख्या कुल 86 थी तो वहीं, 31 जुलाई को सक्रिय मरीजों की संख्या 1364 पर जा पहुंची। इससे प्रशासन से लेकर शासन तक हिल गया है। ऐसे में जिले में और अधिक सैंपल बढ़ाए जाने का निर्णय लिया गया है।
कोरोना ने मार्च में दस्तक दी। उसके बाद जून तक कोरोना के केस बढ़ने की रफ्तार धीमी रही। मगर, जुलाई आते ही कोरोना की रफ्तार कई गुना ज्यादा बढ़ गई। अब अगस्त का महीना कोरोना की दृष्टि से बेहद खतरनाक है। ऐसा सरकार भी मानती है। इसलिए कोरोना संक्रमण के केस ट्रेस करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सैंपलिंग की संख्या बढ़ानी शुरू कर दी है। अब तक जनपद में 34,421 लोगों की सैंपलिंग की गई है। इसमें 2376 कोरोना पॉजिटिव केस निकल चुके हैं। सर्वाधिक कोरोना पॉजिटिव केस जुलाई में ही निकले हैं। पर्याप्त मात्रा में टेस्टिंग के बावजूद संक्रमण के औसत से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं।
तीन दिन पहले बरेली में हुई बैठक में अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद की मंडलीय समीक्षा बैठक में उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को कोरोना की टेस्टिंग बढ़ाने के निर्देश दिए। अपर मुख्य सचिव शासन अमित मोहन का मानना है कि कोरोना का अभी तक कोई इलाज नहीं है। लिहाजा संक्रमितों को जल्द से जल्द ट्रेस करना ही संक्रमण की रफ्तार कम करने का तरीका है। अपर मख्य सचिव की सख्ती के बाद जनपद में एंटीजन किट से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। सीएमओ डॉ. वीके शुक्ल ने सीएचसी पीएचसी के प्रभारियों के साथ बैठक कर सैंपलिंग बढ़ाने को कहा, ताकि जनपद में फैल रहे सामुदायिक संक्रमण को रोका जा सके।
अनलॉक के बाद दोगुनी हो गई संक्रमितों की संख्या
कोरोना संक्रमण फैलने के बाद लॉकडाउन लागू रहने तक जनपद में मात्र 53 कोरोना पॉजिटिव निकले थे। इनमें अधिकतर बाहर आए प्रवासी और कुछ विदेशी नगारिक शामिल थे। स्थानीय लोगों में लॉकडाउन के दौरान बहुत कम लोग ही संक्रमित हुए थे। लेकिन एक जून को अनलॉक-1 होने के बाद कोरोना संक्रमितों की संख्या में इजाफा होना शुरु हो गया। जुलाई में 1300 से अधिक कोरोना संक्रमित मरीज मिल चुके हैं। यह वह लोग हैं, जिनका कोई भी यात्रा इतिहास नहीं है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सामुदायिक संक्रमण तेजी से फैलने लगा है। ऐसे में अगर जरा सी चूक हुई तो आने वाले दिन भयावह हो सकते हैं।
संक्रमण के बाद किसी के संपर्क में आना अपराध
स्वास्थ्य विशेषज्ञ एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार के अनुसार संक्रमण की पुष्टि होने के बाद संक्रमित व्यक्ति बेचैन हो सकता है। ऐसी स्थिति में मानसिक तनाव का शिकार होने के साथ वह अपने संक्रमित होने की बात छिपाकर सामान्य ढंग से दूसरे लोगों के संपर्क में आ सकते हैं। संक्रमण का पता न होने पर लोगों के संपर्क में आना तो सामान्य बात है, लेकिन संक्रमण की पुष्टि होने के बाद भी कोई ऐसा करता है, तो उसे अपराधी माना जाए। शासन ने भी ऐसे संक्रमितों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज करने भी निर्देश दिए हैं।
बचाव ही है सबसे बड़ा रक्षाकवच
कहीं न कहीं संक्रमण फैलने का कारण आम लोगों की लापरवाही भी मानी जा रही है। मास्क और सामाजिक दूरी का पालन न करने वाले लोगों के चलते भी संक्रमण बढ़ रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक मास्क लगाने, ग्लब्स पहनने और साबुन से हाथ धोते रहने के साथ ही बेवजह चेहरे को छूने से बचने की आदत डालनी होगी। यही कोरोना को हराने का सबसे बड़ा कवच है। अगर लोग जागरूक होंगे, तभी कोरोना को हराया जा सकता है।
“शासन के निर्देश मिलने के बाद एंटीजन अधिक सैंपलिंग कराई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में एंटीजन किट से सीएचसी पीएचसी के अलावा कैंप लगाकर भी सैंपलिंग हो रही है। आम लोगों को भी सतर्क रहना होगा। तभी कोरोना से जंग जीत सकते हैं।” –डा.वीके शुक्ल, सीएमओ
