बरेली: साइबर क्राइम से खूब मिली चुनौती, नववर्ष में अपराध रोकने को विशेषज्ञ तैयार
2022 में साइबर ठगों के चक्रव्यूह में फंसे 1305 लोग
ओमेंद्र सिंह,बरेली अमृत विचार। साइबर क्राइम रोकना एक चुनौती बना हुआ है। हाल ही में शहर में साइबर विशेषज्ञों ने दो कार्यशालाओं में साइबर ठगी से बचने के तमाम तरीकों से रूबरू कराया। पूरे साल बरेली वासियों को साइबर ठग अपने चक्रव्यूह में फंसाते रहे।
वर्ष 2021 के मुकाबले 2022 में साइबर अपराध संबंधी शिकायतों में दोगुना वृद्धि हुई है। साइबर अपराधियों ने 1305 लोगों को अपने जाल में फंसाया और करोड़ों रुपये की ठगी की, लेकिन साइबर सेल के एक्सपर्ट एसएसपी अखिलेश कुमार चौरसिया और एसपी अपराध मुकेश प्रताप सिंह के नेतृत्व में विशेष रणनीति बनाते हुए काम करते रहे। उन्होंने करीब 220 लोगों के 54 लाख 98 हजार से अधिक रुपये बचाए।
कई केस में रकम होल्ड भी कराई। साइबर अपराधियों की चुनौती को स्वीकार कर पुलिस के विशेषज्ञ उनके नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश में जुटे हुए हैं। साइबर सेल के इंचार्ज इंस्पेक्टर केवी सिंह ने बताया कि पुलिस लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि लोगों को साइबर ठगी के प्रति सजग रहने की जरूरत है।
घटना होने पर ये काम जरूर करें
- साइबर ठगी होने की स्थिति में तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करें। शिकायत दर्ज करने के बाद आपके रुपये दोबारा मिलने की संभावना बढ़ जाती है। गृह मंत्रालय के साइबर क्राइम पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
- आप अपने बैंक को पूरी घटना के बारे में जानकारी दें। खाते को ब्लाक करा दें। कई बार देखा गया है कि साइबर ठग एक बार रुपये निकालने के बाद पीड़ित के खाते से दोबारा निकालने की कोशिश करते हैं।
- अपने साथ हुई ठगी की शिकायत नजदीकी पुलिस स्टेशन में दर्ज करानी होगी। शिकायत दर्ज कराते समय आपको बैंक पासबुक रिकॉर्ड की कॉपी, आईडी और एड्रेस प्रूफ की कॉपी पुलिस स्टेशन में जमा करनी होगी।
इन बातों का रखें ख्याल-
- डिजिटल वॉलेट का एग्जिक्यूटिव बनकर फोन करने वाले को अनसुना करें।
- अगर यूजर को ऐनीडेस्क या टीम व्यूअर एप डाउनलोड करने के लिए कहे तो न करें।
- अगर एप डाउनलोड हो गया तो वह 9 अंकों का कोड मांगता है तो शेयर न करें।
- अपराध करने तरीके अपडेट करते हैं अपराधी साइबर सेल
शातिरों ने ठगी के तरीके भी बदले
साइबर सेल के इंस्पेक्टर केवी सिंह ने बताया कि एटीएम ठगी से लोग सतर्क हुए तो जालसाजों ने अपराध के तरीके को बदल लिया। पिछले कुछ साल से डिजिटल वॉलेट की सैकड़ों शिकायतें मिली हैं। ये ठग पहले यूजर्स को उसके मोबाइल फोन पर एक एप डाउनलोड कराते हैं। इसके जरिए अकाउंट को लिंक कराने से लेकर स्टेप बाई स्टेप पेमेंट के प्रोसेस तक को भी पूरा कराते हैं फिर चालाकी से अपनी यूपीआई आईडी को पैकेज का कूपन बताकर मोबाइल में सेव करा देता हैं फिर रुपये ट्रांसफर कर लेते हैं। इससे बचना चाहिए।
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