Kanpur News : अज्ञात शवों के साथ शिनाख्त का भी हो जाता अंतिम संस्कार, पुलिस पहचान के लिए कोशिश नहीं करती
Kanpur News कानपुर में पुलिस शव मिलने पर पहचान के लिए कोशिश नहीं करती है।
Kanpur News कानपुर में अज्ञात शवों के साथ शिनाख्त का भी अंतिम संस्कार हो जाता है। पुलिस शव मिलने पर पहचान के लिए कोशिश नहीं करती है। दो माह में 100 अज्ञात शव मिले है। इसमें 40 की ही शिनाख्त हो सकी है।
कानपुर,अमृत विचार। कानपुर कमिश्नरेट के थानाक्षेत्रों में कहीं भी अज्ञात शव मिला तो पुलिस की मुश्किलें खुद ब खुद आसान हो जाती है। पहले तो शव को 72 घंटे के लिए मार्चुरी में रखा जाता है, इसके बाद यदि शिनाख्त के लिए कोई नहीं पहुंचा तो पुलिस शव के अंतिम संस्कार के साथ शिनाख्त के झमेले से भी आसानी से छुटकारा पा लेती है।
पिछले वर्ष नवंबर और दिसंबर माह की बात करें, तो शहर के अलग-अलग थानाक्षेत्रों में 100 अज्ञात शव पोस्टमार्टम हाउस पहुंचाए गए। जहां केवल 40 शवों की शिनाख्त करने के लिए परिजन पहुंचे। अन्य बचे 60 शवों की शिनाख्त एक पहेली बन गई। पहचान के मोहताज को कुछ शव पुरुष व महिलाओं के हैं।
शिनाख्त का नियम
अज्ञात शव मिलने पर पहचान के लिए 72 घंटे तक उसे मार्चुरी में रखना होता है। इसके बाद एनसीआरबी के जरिए जिपनेट एप पर शव की फोटो खींचकर अपलोड कर दूसरे जिलों और प्रदेशों में भेजी जाती है। संबंधित थाने की पुलिस को फोटो और हुलिए के साथ पहचान के लिए पर्चे छपवाकर सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा करना होता है। सोशल मीडिया के जरिए और अखबारों में इसका विज्ञापन निकलवना होता है। इस झमेले से पुलिस पूरी तरह बचती है। वह शिनाख्त के लिए कोई कदम नहीं उठाती है।
गर्मियों में सड़ने लगते शव
वर्तमान में पोस्टमार्टम हाउस में चार डीप फ्रीजर मौजूद हैं। इनमें हर वक्त किसी न किसी का शव रखा रहता है। आए दिन थानाक्षेत्रों में मिलने वाले शवों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में पीएम हाउस में भी फ्रीजरों की संख्या बढ़नी चाहिए। पोस्टमार्टम हाउस के सूत्रों ने बताया कि किसी किसी दिन 5-8 लावारिस शव आ जाते हैं, जिसके चक्कर में मार्चुरी में शवों को रखा जाता है। बताया कि गर्मियों में अज्ञात शवों के बढ़ने पर सड़ने की दिक्कत पैदा हो जाती है। लेकिन सर्दियों में इतनी दिक्कतों का सामना नहीं करना रहता है।
डीप फ्रीजर का नहीं किया जाता इस्तेमाल
पुलिस पहले तो अज्ञात शव की जानकारी होने पर मौके पर पहुंचती है। इसके बाद किसी तरह टेंपो में शव को रखवाकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचवाती है। यदि डीप फ्रीजर खाली भी होते हैं, तो वह झंझट में पड़ने से बचने के लिए शव को मार्चुरी में रखा देती है। पोस्टमार्टम सूत्रों ने बताया कि कभी कभार तो पुलिस शव को रखावकर भूल ही जाती है। जिससे शव पांच-पांच दिन तक सड़ाध मारते रहते हैं। जिसके बाद हुए पोस्टमार्टम में मौत के कारणों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती है।
मरीजों में कुछ लावारिस भी हो जाते हैं बे-पहचान
अज्ञात शवों को लेकर एक सच्चाई मेडिकल कॉलेज से भी जुड़ी है। हर वर्ष बहुत से लावारिस लोगों को बीमारी या घायलावस्था में भर्ती कराया जाता है। भर्ती कराने के दौरान उनका नाम पता भी अंकित होता है, मगर जब मौत के बाद जांच की जाती है तो पता फर्जी निकलता है। इस कारण कुछ की पहचान नहीं हो पाती।
हाल में मिले अज्ञात शव
कुछ दिन पहले कलक्टरगंज थानाक्षेत्र में सीपीसी गोदाम के पास महिला (40) को ट्रक ने कुचल दिया था। आज तक उसकी शिनाख्त के लिए कोई नहीं पहुंचा। इसी तरह कानपुर सेंट्रल के नौ नंबर प्लेटफार्म पर एक अज्ञात अधेड़ (55)का शव बरामद हुआ। इसी तरह चौबेपुर में मिले वृद्धा (59)के शव की शिनाख्त आज तक नहीं हो सकी है। अज्ञात महिला (35)का शव कैंट एरिया में मिला था, पहचान ही तक नहीं हो सकी।
लिखा गया है सीएमओ को पत्र
अज्ञात शवों की पहचान के लिए पोस्टमार्टम हाउस के जिम्मेदार अधिकारियों ने सीएमओ आलोक रंजन को पत्र लिखा है। सूत्रों ने बताया कि पत्र में यह कहा गया है, कि अज्ञात शवों की पहचान के लिए पीएम परिसर में अज्ञातों के हुलियों की फोटो लगाई जाए, जिससे लोगों को असुविधा का सामना न करना पड़ा। अभी ऐसे में लोग हैलट, संबंधित थाना के चक्कर लगाते रहते हैं, जहां से उन्हें सही जानकारी नहीं मिल पाती है। हुलिए के फोटो लगने पर आसानी से शव की पहचान की जा सकेगी।
