जोशीमठ: भू-धंसाव...जोशीमठ से लेकर कर्णप्रयाग तक पहुंची दरारें

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Edited By Amrit Vichar
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जोशीमठ, अमृत विचार। यहां अभूतपूर्व आपदा के बीच एक और चिंतित करने वाली बात सामने आई है कि जोशीमठ जैसी दरारें कर्णप्रयाग तक पहुँच चुकी हैं। हाइवे कई जगह बैठा हुआ है तो वहीं कर्णप्रयाग के कुछ होटल और भवनों में भी दरारें देखने को मिल रही हैं। इधर स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो गया है और ऐसे भवनों का चिन्हीकरण किया जा रहा है।भू-धंसाव में ढहा मकान

14 दिनों से आंदोलन में जुटे हैं स्थानीय लोग

जोशीमठ बचाओ एनटीपीसी हटाओ अभियान को लेकर स्थानीय निवासी पिछले 14 दिनों से तहसील परिसर में धरना दे रहे हैं उनका कहना है कि धामी सरकार केवल गुमराह कर रही है। इस पूरे घटनाक्रम पर उन लोगों का एक ही बयान है कि यह कोई दैवीय आपदा नहीं बल्कि मानव जनित आपदा है जो कि टीबीसी मशीन के फंसे होने , बेतरतीब निर्माण और हाइड्रो प्रोजेक्ट को लगाने से हुई है। उनका साफ कहना है सरकार समय रहते रोक लगा देती तो यह इस मुकाम तक नहीं पहुंचता।भू-धंसाव में दरकीं दीवारें

सभी प्रोजेक्ट रोके गए

लगातार दरारें और मकान खिसकने की घटनाओं को देखते हुए फिलहाल सरकार ने हेलंग ,मारवाड़ी बायपास,चारधाम आल वेदर रोड और एनटीपीसी की परियोजना से संबंधित सभी कार्य रोक दिए गए हैं। इसके अलावा इन परियोजनाओं का विरोध भी लगातार किया जाता रहा है।भू-धंसाव

पीएमओ ने ली उच्च अधिकारियों और एनडीआरएफ की बैठक

रविवार को पीएमओ ने इस पूरे मामले में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक ली है जिसमें एनडीआरएफ भी शामिल रही। फिलहाल इस बैठक पर महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होना बताया जा रहा है शीघ्र ही कोई बड़ा फैसला आ सकता है।

60 परिवार विस्थापित किये जा चुके हैं, होटल,स्कूल में प्रभावित लोगों को शिफ्ट किया जा रहा है। यह संख्या अभी 500 से 600 के बीच जा सकती है। भूगर्भ वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के अनुसार आगे के कदम उठाए जाएंगे। एनटीपीसी की टीबीसी मशीन के टनल में फंसे होने जैसी कोई जानकारी मुझे नहीं है। स्थायी विस्थापन के लिए भूगर्भीय वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के आने के बाद कुछ चिन्हित जगहों को राज्य सरकार के अनुसार आवंटित किया जा सकता है। वहीं प्रभावित परिवारों को छह माह तक चार हजार रुपये किराया देना राज्य सरकार की ओर से आदेशित हुआ है जिसकी सूची तैयार करवाई जा रही है। - हिमांशु खुराना, डीएम चमोली।

प्रभावित लोगों से बातचीत

तहसील और अधिकारियों के चक्कर लगा-लगा कर थक चुकी हूं। कोई कुछ बताने को तैयार नहीं। सब कहते हैं जोशीमठ नहीं रहेगा पर मेरा तो सब कुछ यही है अब इस उम्र में और कहां जाऊंगी। - भारती देवी

हमारे घर का मन्दिर टूट गया पूरा घर तहस नहस हो गया। परिवार में कोई भी सरकारी या प्राइवेट नौकरी में नहीं है। मैं स्कूल जाती हूँ अब यहां प्राइमरी पाठशाला में पूरे परिवार और पालतू जानवरों के साथ रह रही हूँ , सरकार हमें कहीं स्थायी निवास उपलब्ध करवा दे तो बेहतर है। - पिंकी

पूरा मकान जमींदोज हो गया,जितना कमाया था सब एक पल में लूट गया। क्या होगा पता नहीं, बच्चे छोटे हैं , खेती बाड़ी के भरोसे गुजारा भत्ता चलता था अब वो भी नहीं रहा, सर छुपाने को बस स्कूल के इस भवन का सहारा है। स्कूल खुल जायेगा तो हम कहा जाएंगे क्या करेंगे इसी बात की चिंता है। - लक्ष्मी जोश्याल

पिछले कई सालों से हम लोग इस विषय पर शासन-प्रशासन को चेताते आ रहे हैं लेकिन हमारी बात कोई सुनने वाला नहीं। पिताजी की रिटायरमेंट के बाद मिलने वाला पूरा पैसा मकान बनाने में लग गया और अब मकान ही क्षतिग्रस्त हो गया। ऐसे में अब कहाँ जाएं क्या करें कोई नाते रिश्तेदार भी नहीं न मेरे पास कोई नौकरी है। लगता है अब सड़क पर ही जिंदगी गुजारनी पड़ेगी। खेती बाड़ी लायक जमीन भी नहीं सोचा था सर लर छत आ जायेगी तो एक ठौर हो जाएगा पर अब सब शून्य हो गया। - धीरज

 

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