शानदार शॉट....बेहतरीन गोल...की आवाज अब नहीं गूंजेंगी इस मैदान पर
केडी सिंह बाबू स्टेडियम के मुख्य मैदान पर बिछाया जायेगा सिंथेटिक ट्रैक
लखनऊ। जिस मैदान पर दिग्गज बल्लेबाजों के छक्कों पर कभी तालियां गूंज उठती थी...जहां हॉकी के स्टार्स के अभ्यास को देखने के लिए लोग जमा होते थ, हॉकी मैचों में बेहतरीन गोल की आवाज पर लोग खुशी से उस उछल पड़ते थे, उस मैदान की पहचान जल्द ही बदल जायेगी। केडी सिंह बाबू स्टेडियम के मुख्य मैदान के स्वरूप बदले जाने से यहां पर अभ्यास कर कामयाबी का मुकाम छूने वाले पूर्व खिलाड़ी भावुक है, लेकिन खिलाड़ियों और खेल की भलाई के लिए उन्होंने इस बदलाव का स्वागत किया। इस मैदान पर अब शासन ने एथलेटिक्स के खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए सिंथेटिक ट्रैक बिछाने की तैयारी कर ली है। केडी सिंह बाबू स्टेडियम का मुख्य खेल मैदान कई एतिहासिक मुकाबलों का गवाह बना है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबलों के साथ ही कुश्ती के भी मुकाबले खेले गए।
उत्तर प्रदेश ओलम्पिक संघ के सचिव आनन्देश्वर पाण्डेय ने बताया कि इस स्टेडियम की यादें लोगों के दिलों में हमेशा रहेंगी। खेल निदेशक आरपी सिंह के अनुसार शुरुआती दौर में सभी खेलों को बढ़ावा देना था। अब राजधानी खेलों का हब बन गया है। हॉकी के लिए टर्फ मौजूद है तो क्रिकेट के लिए भी स्टेडियम मौजूद है। इस स्टेडियम से बहुत से खिलाड़ियों की सुनहरी यादें जुड़ी है। बताते चले कि केडी सिंह बाबू स्टेडियम का काया कल्प करने को 25 करोड़ रुपए का बजट शासन ने प्रदान किया गया है। इस बजट में स्टेडियम के मुख्य मैदान पर सिंथेटिक ट्रैक बिछाया जायेगा। इसके अलावा हैंडबाल और बास्केटबाल मैदान का भी जीर्णोद्धार सहित कई कार्य होंगे।
क्रिकेट के ये मुकाबले खेले गये
18 से 22 जनवरी 1994 में भारत बनाम श्रीलंका
27 अक्टूबर 1987 में पाकिस्तान बनाम श्रीलंका
21 से 23 नवम्बर 1976 में भारत बनाम वेस्टइंडीज- महिला टेस्ट
14 से 17 जनवरी 2002 में भारत बना इंग्लैंड - महिला टेस्ट
5 दिसम्बर 1995 भारत बनाम इंग्लैंड- महिला वनडे
एक दिसम्बर 2005 में भारत बनाम इंग्लैंड- महिला वनडे
बॉलीवुड के दिलीप कुमार ने यहां की थी बल्लेबाजी
मंसूर अली खां पटौदी, कपिल देव, चेतन चौहान, बिशन सिंह बेदी, मनोज प्रभाकर, नवजोत सिंह सिद्धू, अजय शर्मा, कीर्ति आजाद, मो. कैफ, आरपी सिंह, युवराज सिंह, सुरेश रैना, प्रवीण कुमार जैसे दिग्गज यहां पर खेल चुके हैं। इसके अलावा सुनील गवास्कर और वीनू मांकड भी प्रदर्शनी मैच खेल चुके हैं। ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार शीश महल क्रिकेट में बल्लेबाजी कर चुके हैं। वह 1970 में बाबू स्टेडियम में आयोजित इस ट्रॉफी का शुभारम्भ करने वह बाबू स्टेडियम आए थे। 2010 में टीम इंडिया के पूर्व गेंदबाज एस श्रीसंत ने शीश महल क्रिकेट टूर्नामेंट में शिरकत की थी। यहां पर उपजेता रही टीम के सदस्य थे। फाइनल मैच के बाद उन्हें टीम इंडिया के पूर्व गेंदबाज हरभजन सिंह ने सम्मानित किया।
हॉकी के प्रदर्शनी मैच
इस मैदान पर एशिया इलेवन और इंडिया इलेवन के मध्य प्रदर्शन मैच 1975 में खेला गया। इसके अलावा हॉलैंड और लखनऊ इलवेन के मध्य भी प्रदर्शन मैच आयोजित किया गया।
दारा सिंह ने थी पाकिस्तान के पहलवानों को पटखनी
केडी सिंह बाबू स्टेडियम के इसी मैदान पर दारा सिंह ने अपने दांव पेच दिखाये। यहां हुए अंतरराष्ट्रीय कुश्ती के मुकाबलों में उन्होंने पाकिस्तान के पहलवानों को धूल चटाई।
कोट
हॉकी छात्रावास की शुरुआत जब यहां पर हुई थी, तब मैंने यहां पर दाखिला लिया। यहां पर हॉकी की ट्रेनिंग लेकर ओलंपिक तक का सफर तय किया। मैदान का स्वरूप भले बदल जाये लेकिन हमारी यादों में मैदान की तस्वीर हमेशा रहेगी।
सै.अली, पूर्व ओलम्पियन, हॉकी
कोट
तकरीबन 20 वर्ष तक मैने इस खेल मैदान पर अभ्यास किया है। एथलेटिक्स के खिलाड़ियों को सौगात देने को इसमें परिवर्तन किया जा रहा है, यह अच्छी बात है। लेकिन इस मैदान पर अभ्यास के दिन हम कभी नहीं भुला पायेंगे।
सुजीत कुमार पूर्व, ओलम्पियन हॉकी
कोट
एथलेटिक्स का छात्रावास यहां पर मौजूद है। सिंथेटिक ट्रैक बिछने के बाद यहां पर बालिका खिलाड़ियों को अभ्यास का लाभ मिलेगा। यह एक अच्छी शुरुआत होगी।
अजय सेठी, क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी लखनऊ
उत्तर प्रदेश खेल निदेशालय
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